धरती कहे पुकार: सादगी की मूरत नंदा और वो सदाबहार गीत ‘जे हम तुम चोरी से…’

मुंबई: भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर की जब भी बात होती है, एक ऐसा चेहरा जेहन में आता है जिसकी मुस्कान में मासूमियत और आँखों में गहराई थी। हम बात कर रहे हैं अभिनेत्री नंदा की। आज भी सोशल मीडिया से लेकर गलियों तक उनका एक गाना फिर से गूँज रहा है— ‘जे हम तुम चोरी से एक डोरी से बँध जाएं…’। साल 1969 में आई फिल्म ‘धरती कहे पुकार’ का यह गीत आज भी उतना ही ताजा महसूस होता है जितना पाँच दशक पहले था। जितेंद्र और नंदा की जोड़ी ने इस गाने में जो सादगी पिरोई, वह आज के शोर-शराबे वाले संगीत के दौर में सुकून की तरह है।

क्यों खास है यह गाना?
इस गीत की सबसे बड़ी खूबी इसकी मासूमियत और देसी अंदाज है। मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे बोल और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का लोक संगीत (Folk Music) पर आधारित संगीत इसे हर दिल अजीज बनाता है।
- मिठास: लता मंगेशकर और मुकेश की आवाजों ने इस गाने में रूह फूँक दी है।
- लोक संस्कृति: गाने का फिल्मांकन ग्रामीण परिवेश में है, जहाँ नंदा की सादगी और जितेंद्र का चुलबुलापन दर्शकों को गाँव की सोंधी मिट्टी से जोड़ देता है।
- आज भी हिट: यही कारण है कि आज भी शादियों, पारिवारिक उत्सवों और अब इंस्टाग्राम रील्स पर यह गाना ट्रेंड कर रहा है।

नंदा: सफलता का शिखर और तन्हाई का सफर
नंदा का फिल्मी करियर किसी मिसाल से कम नहीं था। ‘छोटी बहन’, ‘भाभी’, ‘जब जब फूल खिले’ और ‘गुमनाम’ जैसी फिल्मों से उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई। उन्हें फिल्म जगत में ‘बेबी नंदा’ के नाम से प्यार मिला और बाद में वे एक दिग्गज अभिनेत्री के रूप में उभरीं।
निजी जिंदगी का अकेलापन:
पर्दे पर रोमांस और खुशियाँ बिखेरने वाली नंदा की असल जिंदगी काफी अलग रही। वे ताउम्र कुंवारी रहीं। हालांकि, उनकी जिंदगी में प्यार ने दस्तक दी थी।
”साल 1992 में उन्होंने मशहूर निर्देशक मनमोहन देसाई से सगाई की थी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। एक हादसे में देसाई का निधन हो गया और नंदा ने उसके बाद खुद को पूरी तरह तन्हा कर लिया और कभी शादी नहीं की।”
जीतेंद्र और नंदा की केमिस्ट्री
’धरती कहे पुकार’ में नंदा और जितेंद्र की केमिस्ट्री को काफी सराहा गया था। जितेंद्र, जो उस दौर के ‘जंपिंग जैक’ कहे जाते थे, इस फिल्म में एक बेहद गंभीर और मिट्टी से जुड़े किरदार में नजर आए थे। फिल्म की कहानी किसानों और उनके संघर्षों पर आधारित थी, जिसने बॉक्स ऑफिस पर भी खूब वाहवाही बटोरी थी।
निष्कर्ष
आज नंदा हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी फिल्में और ‘जे हम तुम चोरी से’ जैसे कालजयी गीत उन्हें हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रखेंगे। उनकी सादगी आज की पीढ़ी के लिए एक सबक है कि बिना किसी तड़क-भड़क के भी कैसे कला के जरिए अमर हुआ जा सकता है।









