आत्मनिर्भरता की गूँज: सोमनाथ मंदिर से जुड़ी महिलाएं कमा रही हैं सालाना ₹9 करोड़, बना सशक्तिकरण का अनूठा मॉडल

भारत की प्राचीन भव्यता और आस्था का प्रतीक ‘श्री सोमनाथ मंदिर’ आज केवल आध्यात्मिक चेतना का केंद्र ही नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की एक नई गाथा लिख रहा है। सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट की समावेशी नीतियों के चलते आज सैकड़ों महिलाएं आत्मनिर्भरता की राह पर हैं और मंदिर प्रबंधन में रीढ़ की हड्डी बनकर उभरी हैं।

आंकड़ों में नारी शक्ति: 363 महिलाओं को सीधा रोजगार
ट्रस्ट द्वारा जारी हालिया आंकड़ों के अनुसार, मंदिर के विभिन्न प्रकल्पों के माध्यम से कुल 363 महिलाओं को सीधा रोजगार प्राप्त हो रहा है। वर्तमान में ट्रस्ट के कुल 906 कर्मचारियों में से 262 महिलाएं हैं। यह संख्या दर्शाती है कि ट्रस्ट न केवल रोजगार दे रहा है, बल्कि कार्यबल में लैंगिक समानता और समावेशी विचारधारा को प्राथमिकता दे रहा है।
बिल्व वन: प्रकृति के संरक्षण में महिलाओं का हाथ
मंदिर परिसर का पवित्र ‘बिल्व वन’ आज महिलाओं के कुशल प्रबंधन का जीता-जागता उदाहरण है। यहाँ 16 महिलाएं पर्यावरण संरक्षण, हरियाली और स्वच्छता की पूरी जिम्मेदारी संभाल रही हैं। प्रकृति और पवित्रता के इस संगम को महिलाएं बड़ी कुशलता से संजो रही हैं।
सेवा और प्रबंधन में अग्रणी
श्रद्धालुओं की सेवा में भी महिलाएं पीछे नहीं हैं:
- प्रसाद वितरण: 65 महिलाएं प्रसाद काउंटर और वितरण व्यवस्था को अनुशासन के साथ संभाल रही हैं।
- भोजन सेवा: 30 महिलाएं प्रतिदिन हजारों भक्तों को सेवाभाव के साथ भोजन परोसने का कार्य करती हैं।

9 करोड़ की सामूहिक आय: आर्थिक स्वावलंबन की नई ऊंचाइयां
इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आर्थिक मजबूती है। मंदिर ट्रस्ट से जुड़ी ये महिलाएं सालाना लगभग 9 करोड़ रुपए की सामूहिक आय अर्जित कर रही हैं। यह वित्तीय स्वतंत्रता न केवल उनके जीवन स्तर को सुधार रही है, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी नई उड़ान दे रही है।
“सोमनाथ मंदिर ने सिद्ध कर दिया है कि धार्मिक संस्थान अपनी आध्यात्मिक जड़ों से जुड़े रहकर भी आधुनिक सामाजिक परिवर्तन के सबसे बड़े वाहक बन सकते हैं।”

आज सोमनाथ धाम से न केवल मंत्रों की गूंज सुनाई देती है, बल्कि वहां काम करने वाली महिलाओं के स्वाभिमान की सुगंध भी पूरे देश को प्रेरित कर रही है।








