बांग्लादेश में हिंदुओं के लिए ‘काल’ बना पिछला पखवाड़ा: 19 दिनों में 8वीं मौत, अब नाओगांव में युवक ने नहर में कूदकर गंवाई जान

ढाका/मोहादेवपुर: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अराजक तत्वों और भीड़ तंत्र (Mobocracy) के खौफ से अल्पसंख्यकों में दहशत का माहौल है। ताजा मामला नाओगांव जिले के मोहादेवपुर उपजिला से सामने आया है, जहां भीड़ से जान बचाने के प्रयास में एक हिंदू युवक की नहर में डूबने से मौत हो गई।
चोरी के शक में पीछा, जान बचाने को नहर में कूदा मिथुन
स्थानीय मीडिया और पुलिस रिपोर्ट्स के अनुसार, मृतक की पहचान 25 वर्षीय मिथुन सरकार के रूप में हुई है। घटना मंगलवार दोपहर की है जब चकगोरी इलाके में कुछ लोगों ने मिथुन पर चोरी का आरोप लगाया। देखते ही देखते उत्तेजित भीड़ ने उसे घेर लिया और उसका पीछा करना शुरू कर दिया। उग्र भीड़ से खुद को बचाने के लिए मिथुन पास ही स्थित एक गहरी नहर में कूद गया। पानी का बहाव तेज होने के कारण वह संभल नहीं सका और डूब गया।
घंटों चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद फायर सर्विस और सिविल डिफेंस की टीम ने शव को बरामद किया। मोहादेवपुर थाने के प्रभारी (OC) शाहिदुल इस्लाम ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा, “शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले की कानूनी जांच जारी है।”

खूनी आंकड़ों की गवाही: 19 दिन, 8 हिंदू मौतें
बांग्लादेश में पिछले 19 दिनों का घटनाक्रम यह बताने के लिए काफी है कि वहां कानून-व्यवस्था की स्थिति कितनी बदतर हो चुकी है। इस एक सप्ताह में ही यह तीसरी मौत है।
यूनुस सरकार की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
डॉ. मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यकों पर बढ़ते इन हमलों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंता में डाल दिया है। मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि सरकार इन घटनाओं को रोकने में न केवल विफल रही है, बल्कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय ‘खामोशी’ अख्तियार किए हुए है।

अल्पसंख्यक नेताओं का कहना है कि “चोरी” या “ईशनिंदा” जैसे आरोप अक्सर भीड़ को उकसाने और टारगेट किलिंग के लिए ढाल के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे हैं।








