भ्रष्टाचार पर सवाल पूछने वाले पत्रकारों और कार्यकर्ताओं पर FIR; बठिंडा में रोष, 4 जनवरी को चंडीगढ़ में बड़ा प्रदर्शन

बठिंडा। पंजाब में पत्रकारों की आवाज़ दबाने और उन पर सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर मुक़दमे दर्ज करने के विरोध में बठिंडा प्रेस क्लब में पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई। बैठक में सरकार द्वारा नए साल के पहले ही दिन पत्रकारों और आरटीआई (RTI) कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज की गई FIR की कड़ी निंदा की गई।
क्या है पूरा मामला?
पत्रकारों का आरोप है कि उन्होंने मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में सरकारी हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल और उसके खर्च को लेकर सवाल उठाए थे। सरकार ने जवाब में बताया कि अधिकृत लोग इसका उपयोग कर सकते हैं, लेकिन इसके तुरंत बाद लुधियाना में आरटीआई एक्टिविस्ट मानक गोयल और बठिंडा के तीन पत्रकारों— मनिंदर सिंह, मिंटू गुरुसरिया और मनदीप मक्कड़ समेत कुल 10 लोगों पर मामला दर्ज कर दिया गया।

पत्रकार समाज की मुख्य घोषणाएं:
बैठक के दौरान पत्रकार भाईचारे ने सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है:
- चंडीगढ़ में प्रदर्शन: 4 जनवरी को दोपहर 1:00 बजे सेक्टर-17, चंडीगढ़ में पंजाब भर के पत्रकार और जन संगठनों के प्रतिनिधि इकट्ठा होकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन करेंगे।
- जमानत न लेने का फैसला: आरोपी पत्रकारों ने स्पष्ट किया है कि वे इस “झूठे” मामले में जमानत के लिए आवेदन नहीं करेंगे।
- गिरफ्तारी की चुनौती: पत्रकारों ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा, “हमारे फोन चालू हैं और लोकेशन ऑन है। सरकार जब चाहे हमें गिरफ्तार कर सकती है, हम डरने वाले नहीं हैं।”
- जन संगठनों का साथ: 10 जनवरी को बठिंडा में विभिन्न जन संगठनों के साथ बैठक कर आगामी संघर्ष की रणनीति तैयार की जाएगी।

“आवाज़ दबाने की कोशिश”
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय इन पत्रकारों का कहना है कि सरकार कभी उनके पेज बंद करवाती है, कभी स्ट्राइक भेजती है और अब सीधे जेल भेजने की तैयारी में है। उनका कहना है कि यदि आज पंजाब का आम नागरिक और पत्रकार नहीं बोला, तो आने वाली सरकारें और भी तानाशाही रवैया अपनाएंगी।








