अजनाला थाना हमला: “पूरे देश की अंतरात्मा दहल गई”, हाईकोर्ट ने खारिज की 5 जमानत याचिकाएं

चंडीगढ़: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अजनाला पुलिस स्टेशन पर हुए हमले के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए सांसद अमृतपाल सिंह के साथियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अजनाला की घटना ने न केवल देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया, बल्कि यह देश की संप्रभुता और अखंडता को एक सीधी चुनौती थी।
कानून को हाथ में लेने की इजाजत नहीं: हाईकोर्ट
जस्टिस सूर्य प्रताप सिंह की पीठ ने गुरमीत सिंह गिल उर्फ गुरमीत सिंह बक्कणवाला सहित पांच आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि एक अवैध भीड़ ने कानून को अपने हाथ में लिया। कोर्ट ने कहा, “रिकॉर्ड से पता चलता है कि याचिकाकर्ता उस हिंसक भीड़ का हिस्सा था जो घातक हथियारों से लैस थी। उन्होंने अपने एक साथी को रिहा कराने के लिए पुलिस स्टेशन पर हमला किया, जो कानून का घोर उल्लंघन है।”

”असाधारण स्थितियों के लिए असाधारण दृष्टिकोण जरूरी”
अदालत ने कहा कि यह केवल कानून और व्यवस्था (Law and Order) की सामान्य समस्या नहीं थी। बेंच ने टिप्पणी की कि जब कोई भीड़ खुद को कानून से ऊपर समझने लगे और सुरक्षाकर्मियों पर हमला करने से भी न हिचकिचाए, तो ऐसे मामलों में जमानत के सामान्य मानदंडों को यांत्रिक (mechanically) रूप से लागू नहीं किया जा सकता।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 23 फरवरी 2023 का है, जब ‘वारिस पंजाब दे’ के प्रमुख अमृतपाल सिंह की अगुवाई में लगभग 200-250 हथियारबंद समर्थकों ने अमृतसर के अजनाला थाने पर धावा बोल दिया था। भीड़ ने पुलिस बैरिकेड्स तोड़ दिए और थाने के अंदर घुसकर अपने साथी लवप्रीत सिंह तूफान को पुलिस हिरासत से छुड़ा लिया था। इस हिंसक झड़प में एसपी स्तर के अधिकारियों समेत छह पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

FIR की धाराएं: पुलिस ने 24 फरवरी, 2023 को हत्या के प्रयास (धारा 307), सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने और आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
कोर्ट की सख्ती: हाईकोर्ट ने कहा कि भीड़ द्वारा किया गया शक्ति प्रदर्शन यह दर्शाता है कि वे खुद को भारत के संविधान और कानून से ऊपर मानते थे।








