ट्रम्प प्रशासन का बड़ा फैसला: 19 ‘चिंतित देशों’ के ग्रीन कार्डों की होगी दोबारा जांच, व्हाइट हाउस के पास हुई गोलीबारी के बाद उठाया कदम

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। प्रशासन ने ऐलान किया है कि वह 19 देशों के लोगों को जारी किए गए ग्रीन कार्डों की पूरी और सख्ती से दोबारा जांच करेगा।
ग्रीन कार्ड की समीक्षा
घोषणा: अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवाओं (USCIS) के प्रमुख जोसेफ एडलो ने यह ऐलान किया है।
निर्देश: एडलो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने उन्हें हर “चिंता वाले देश” के लोगों के ग्रीन कार्डों की फिर से जांच करने का सीधा निर्देश दिया है।
सुरक्षा सर्वोपरि: एडलो ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि “इस देश और अमेरिकी लोगों की सुरक्षा सबसे अहम है। अमेरिकी लोग पिछले प्रशासन की लापरवाही भरी पुनर्वास नीतियों की कीमत नहीं चुकाएंगे।”

तत्काल कारण और ‘चिंतित देश’
ट्रिगर: यह कदम व्हाइट हाउस के पास हुई गोलीबारी की घटना के तुरंत बाद उठाया गया है, जिसमें दो नेशनल गार्ड सैनिकों को गोली लगी थी।
संदिग्ध: गोलीबारी के संदिग्ध की पहचान एक अफगान नागरिक, रहमानउल्ला लकनवाल के रूप में हुई है, जो 2021 में एक विशेष आव्रजन सुरक्षा कार्यक्रम के तहत अमेरिका आया था।
देशों का ब्यौरा: हालांकि, जोसेफ एडलो ने उन 19 देशों के नाम स्पष्ट रूप से नहीं बताए हैं जिनकी जांच होगी।

संभावित सूची: एजेंसी ने व्हाइट हाउस के जून में किए गए एक पिछले ऐलान की ओर इशारा किया, जिसमें अफगानिस्तान, क्यूबा, हैती, ईरान, सोमालिया, वेनेजुएला, बर्मा, चाड, कांगो गणराज्य और लीबिया जैसे देश शामिल थे।
अफगानिस्तान पर रोक: अमेरिका ने अफगानिस्तान से सभी आव्रजन अर्जियों को प्रॉसेस करना भी रोक दिया है। एडलो के अनुसार, अफगानिस्तान में पासपोर्ट या सिविल दस्तावेज़ जारी करने के लिए कोई सहकारी केंद्रीय प्राधिकरण नहीं है और वहां सही स्क्रीनिंग और जांच के तरीके नहीं हैं।
ट्रम्प का बयान
राष्ट्रीय सुरक्षा खतरा: इस हमले के बाद, डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि गोलीबारी ने “एक अहम राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे” को उजागर किया है।
पूर्व प्रशासन पर निशाना: उन्होंने पिछले बिडेन प्रशासन पर दुनिया भर के 20 मिलियन अज्ञात और गैर-प्रमाणित विदेशियों को अनुमति देने का आरोप लगाया, जो अब एक बड़ा खतरा बन रहे हैं।
इस ग्रीन कार्ड समीक्षा का तरीका क्या होगा, इस बारे में एडलो ने फिलहाल कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी है। लेकिन यह स्पष्ट है कि अमेरिका में आव्रजन नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है।








