पठानकोट के शेखुपुरा जट्टां की मंजीरी में जे.सी.बी. मशीनों से धड़ल्ले से निकाली जा रही रेत; खनन माफिया के हौसले बुलंद
पठानकोट, पंजाब: पंजाब सरकार की बाढ़ राहत नीति ‘जिसका खेत, उसकी रेत’ का खनन माफिया द्वारा सरेआम दुरुपयोग किया जा रहा है। पठानकोट जिले के शेखुपुरा जट्टां की मंजीरी (हल्का भोआ) में दरिया के किनारे वाली जमीन पर, क्रशर मालिकों द्वारा रात-दिन जे.सी.बी. मशीनों का प्रयोग कर अवैध खनन किया जा रहा है। पीड़ित किसान सुखदेव सिंह ने सरकार से हस्तक्षेप करने और इस गैर-कानूनी गतिविधि को रोकने की अपील की है।

बाढ़ राहत नीति का दुरुपयोग:
पिछले दिनों पंजाब में आई भीषण बाढ़ के बाद, लोगों को राहत पहुँचाने के लिए सरकार ने यह नीति बनाई थी, जिसके तहत किसान अपनी जमीन से गाद निकालने के नाम पर रेत निकाल सकते थे। लेकिन, क्रशर मालिकों ने इस योजना की आड़ लेकर धड़ल्ले से खनन शुरू कर दिया है, जिससे सरकार की नीति की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

पानी में डूबी जमीन से भी खनन:
स्थानीय किसान सुखदेव सिंह के अनुसार, क्रशर माफिया ‘जिसका खेत, उसकी रेत’ योजना का नाजायज फायदा उठा रहा है। खनन इस हद तक किया गया है कि जमीन से पानी तक निकल आया है। टिप्परों में कच्चा और गीला माल भरकर नजदीकी क्रशरों में भेजा जा रहा है। किसान ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि उन्हें माफिया की तरफ से धमकी भी मिली है, जिसमें उन्हें 15 किलोमीटर दूर से उठाने की धमकी दी गई है।

प्रशासन की कार्रवाई और आश्वासन:
मामले की जानकारी मिलने पर, एस.डी.ओ. ने तुरंत टीम के साथ घटनास्थल का दौरा किया और बताया कि उन्होंने वहाँ मौजूद टिप्पर मशीनों को चेतावनी दी है। उन्होंने क्रशर मालिकों को सख्त निर्देश दिया है कि कल से टिप्पर मशीनें नहीं लगनी चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि “अगर कल से फिर टिप्पर मशीनें लगाई गईं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

हालांकि, प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया है, पर सवाल यह है कि यदि यह अवैध खनन दिन-रात और लगातार जारी रहा, तो आने वाले समय में दरिया किनारे के इस क्षेत्र पर कितना बड़ा खतरा मंडराएगा। किसान ने पुनः सरकार से अपील की है कि वे अपना प्रतिनिधि भेजकर जमीन का मौका-मुआयना करें और इस अवैध धंधे पर रोक लगाएँ।








