डोनाल्ड ट्रंप का प्रवासियों को एक और झटका! बदले वर्क परमिट के नियम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने प्रवासी श्रमिकों के लिए एक नया नियम लागू किया है जिससे उनके काम और देश में रहने पर काफी असर पड़ेगा। यह फैसला अब उन प्रवासियों को राहत प्रदान नहीं करेगा जो पहले, बिडेन प्रशासन की नीति के तहत, अपने वर्क परमिट (EAD) की अवधि समाप्त होने के बाद भी आवेदन लंबित रहने तक कानूनी तौर पर काम कर सकते थे। अब, प्रत्येक वर्क परमिट एक्सटेंशन के लिए नई सुरक्षा जांचों और वेटिंग प्रक्रिया की आवश्यकता होगी।

यूएससीआईएस के निदेशक जोसेफ एडलो ने कहा कि यह कदम राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर विदेशी नागरिकों की बेहतर जांच करने के लिए उठाया गया था। उन्होंने कहा कि “यह एक सामान्य समझ वाला कदम है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी विदेशी के वर्क परमिट को बढ़ाने से पहले जांच पूरी हो चुकी है। संयुक्त राज्य अमेरिका में काम करना एक विशेषाधिकार नहीं, बल्कि एक विशेष अधिकार है

अमेरिका में एक रोजगार प्राधिकरण दस्तावेज़ (EAD), या वर्क परमिट, उन प्रवासियों को जारी किया जाता है जिन्हें देश में अस्थायी काम करने की इजाजत दी जाती है। इसमें शरण के लिए आवेदन करने वाले प्रवासी, H-1B या ग्रीन कार्ड होल्डर (H4) के कुछ जीवनसाथी, F-1 वीज़ा पर पढ़ रहे छात्र और OPT के तहत काम करने वाले शामिल हैं। ग्रीन कार्ड होल्डर, H-1B, L-1, और O-1 वीज़ा होल्डरों को वर्क परमिट की आवश्यकता नहीं है। इस फैसले का भारतीयों पर काफी प्रभाव पड़ेगा।
यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) के मुताबिक 30 अक्टूबर, 2025 को या इसके बाद EAD नवीनीकरण के लिए आवेदन करने वाले प्रवासियों को अब स्वचालित एक्सटेंशन (18-महीने का एक्सटेंशन) नहीं मिलेगा। हालांकि, कुछ सीमित अपवाद रहेंगे। डीएचएस के एक बयान में कहा गया है कि “धोखाधड़ी या संदिग्ध गतिविधि को रोकने के लिए प्रत्येक आवेदन की अब व्यक्तिगत रूप से जांच की जाएगी। बार-बार पृष्ठभूमि की जांच विदेशी नागरिकों की पहचान करने में मदद करेगी जिनके इरादे देश के लिए हानिकारक हो सकते हैं।”
अधिकारियों के मुताबिक यह नया नियम उन लोगों पर लागू नहीं होगा जिनके वर्क परमिट 30 अक्टूबर, 2025 से पहले अपने आप बढ़ा दिए गए थे। यूएससीआईएस ने कहा है कि प्रवासी अपने काम में किसी भी रुकावट से बचने के लिए, 180 दिन पहले अपने EAD नवीनीकरण आवेदन समय पर दाखिल करें। देर से आवेदन देने से उनके वर्क परमिट की मियाद खत्म हो सकती है और रोज़गार में अस्थायी रुकावट आ सकती है








