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विज्ञापन गुरु पीयूष पांडे का 70 वर्ष की आयु में निधन: भारतीय रचनात्मकता के एक युग का दुखद अंत

फेविकोल’, ‘कैडबरी’ जैसे अमर विज्ञापनों के जनक ने गुरुवार को ली अंतिम सांस; देश भर में शोक की लहर

मुंबई/नई दिल्ली भारतीय विज्ञापन जगत को अपनी ज़ुबान और पहचान देने वाले, पद्म श्री से सम्मानित दिग्गज विज्ञापन हस्ती पीयूष पांडे का गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025 को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 70 वर्ष के थे।

​उनके निधन की खबर से देश की रचनात्मक और संचार दुनिया में गहरा शून्य छा गया है। पीयूष पांडे ने चार दशकों से अधिक के करियर में भारतीय उपभोक्ताओं के दिल को छूने वाले कई यादगार विज्ञापन अभियानों को जन्म दिया। उनके काम ने विज्ञापन को केवल उत्पाद बेचने का साधन नहीं, बल्कि आम भारतीय जीवन और संस्कृति को दर्शाने वाली कला बना दिया।

​उन्हें विशेष रूप से ‘फेविकोल का जोड़ है, टूटेगा नहीं’, ‘कुछ खास है ज़िन्दगी में’ (कैडबरी), एशियन पेंट्स का ‘हर घर कुछ कहता है’, और वोडाफोन के प्रसिद्ध ‘पग’ वाले विज्ञापनों के लिए याद किया जाता है। यहाँ तक कि 2014 के आम चुनावों का चर्चित नारा ‘अबकी बार मोदी सरकार’ भी उनकी ही देन थी

विदाई और श्रद्धांजलि

​पीयूष पांडे के अंतिम दर्शन के लिए मुंबई स्थित उनके निवास पर शुक्रवार को गणमान्य व्यक्तियों का तांता लगा रहा। विज्ञापन, कला, राजनीति और बॉलीवुड जगत के कई दिग्गज सितारे उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे।

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि, “पीयूष पांडे जी अपनी रचनात्मकता के लिए प्रशंसित थे। विज्ञापन और संचार की दुनिया में उनका योगदान अतुलनीय है। उनके जाने से दुखी हूँ। ओम शांति।

​एक भावुक श्रद्धांजलि में, एक वरिष्ठ विज्ञापन कार्यकारी ने कहा, “पीयूष जी ने हमें सिर्फ ब्रांड बनाना नहीं सिखाया, बल्कि उन्होंने भारतीय कहानियों को उसकी अपनी मिट्टी की सुगंध दी। उनकी कमी हमेशा खलेगी।”

​उनका अंतिम संस्कार शनिवार को मुंबई में किया जाएगा।

Ami News
Author: Ami News

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