भारत-न्यूजीलैंड संबंधों में नए युग की शुरुआत: 40 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का ऐतिहासिक दौरा
नई दिल्ली/वेलिंगटन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 10-11 जुलाई के ऐतिहासिक न्यूजीलैंड दौरे ने दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में एक नई ऊर्जा फूंक दी है। पिछले 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा की गई यह पहली न्यूजीलैंड यात्रा है। इस ऐतिहासिक दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच ‘इंडिया-न्यूजीलैंड स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप: रोडमैप टू 2030’ (India-New Zealand Strategic Partnership: Roadmap to 2030) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों को कवर करने वाले 10 बेहद महत्वपूर्ण समझौते शामिल हैं।
आर्थिक संबंधों को मिलेगी नई रफ्तार: $20 बिलियन का निवेश और नौकरियां
इस दौरे का मुख्य आकर्षण दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना रहा। नए समझौतों के तहत रोजगार के बड़े अवसर पैदा हुए हैं:
- कुशल कामगारों के लिए राह खुली: नए समझौते के तहत अब हर साल भारत के 5,000 कुशल कामगारों (Skilled Workers) को न्यूजीलैंड में काम करने का मौका मिलेगा।
- बड़ा निवेश: न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 बिलियन डॉलर का भारी-भरकम निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है।
- FTA और व्यापार का विस्तार: वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 2.4 बिलियन डॉलर का है। अब मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के माध्यम से कृषि और फूड टेक्नोलॉजी (खाद्य प्रौद्योगिकी) के क्षेत्रों में व्यापार को कई गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
रणनीतिक साझेदारी और भारतीय प्रवासियों का गर्मजोशी से स्वागत
न्यूजीलैंड में रह रहे लगभग 3 लाख भारतीय मूल के लोगों (डायस्पोरा) ने प्रधानमंत्री मोदी का भव्य और भावुक स्वागत किया। प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत बनाने में भारतीय समुदाय के योगदान की जमकर सराहना की।
रणनीतिक मोर्चे पर, भारत न्यूजीलैंड को अपनी ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और इंडो-पैसिफिक रणनीति में एक बेहद अहम साझेदार के रूप में देखता है। दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया। इसके अलावा, क्रिकेट और हॉकी जैसी साझा खेल संस्कृति के माध्यम से सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने पर भी सहमति बनी।
बढ़ती नजदीकी और आर्थिक भविष्य
यह ऐतिहासिक दौरा न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की 2025 में हुई भारत यात्रा के बाद हुआ है, जो दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ रही नजदीकी का स्पष्ट प्रतीक है। आर्थिक विश्लेषकों और विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन समझौतों को जमीनी स्तर पर पूरी तत्परता से लागू किया जाता है, तो यह दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।











