मसूड़ों की सूजन को न लें हल्के में: दिल के लिए जानलेवा बन सकता है ब्रश करते समय खून आना, शोध में खुलासा
अगर सुबह ब्रश करते समय आपके मसूड़ों से खून आता है या उनमें लगातार सूजन बनी रहती है, तो इसे केवल दांतों की समस्या मानकर नजरअंदाज करने की भूल न करें। यह लापरवाही सीधे आपके दिल को बीमार कर सकती है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) के एक हालिया और चौंकाने वाले अध्ययन में सामने आया है कि मसूड़ों की बीमारी पैदा करने वाला एक खतरनाक बैक्टीरिया आपके दिल के वॉल्व को पूरी तरह बर्बाद कर सकता है।
‘P. gingivalis’ बैक्टीरिया है असली विलेन
वैज्ञानिकों के अनुसार, मसूड़ों में संक्रमण फैलाने के लिए जिम्मेदार ‘पॉर्फिरोमोनास जिंजिवैलिस’ (P. gingivalis) नाम का बैक्टीरिया बेहद खतरनाक है। मसूड़ों में सूजन होने या खून आने पर यह बैक्टीरिया घाव के रास्ते हमारे खून (रक्त प्रवाह) में प्रवेश कर जाता है। खून के जरिए बहते हुए यह सीधे दिल के सबसे महत्वपूर्ण ‘एओर्टिक वॉल्व’ तक पहुंच जाता है।
कैसे करता है दिल पर हमला?
दिल तक पहुंचने के बाद यह बैक्टीरिया एओर्टिक वॉल्व में गंभीर सूजन पैदा करता है। इस सूजन के कारण वॉल्व पर कैल्शियम जमा होने की प्रक्रिया (Calification) बहुत तेज हो जाती है। धीरे-धीरे वॉल्व सख्त और संकरा हो जाता है। चिकित्सा विज्ञान में इस गंभीर स्थिति को ‘कैल्सिफिक एओर्टिक वॉल्व स्टेनोसिस’ (Calcific Aortic Valve Stenosis) कहा जाता है।
क्यों खास है एओर्टिक वॉल्व?
एओर्टिक वॉल्व दिल का वह मुख्य दरवाजा है, जहाँ से शुद्ध और ऑक्सीजन युक्त खून पूरे शरीर में पंप होता है। जब इस वॉल्व पर कैल्शियम की सख्त परत जम जाती है, तो यह ठीक से खुल नहीं पाता।
बढ़ जाता है हार्ट अटैक और फेलियर का खतरा
वॉल्व के संकरा होने के कारण दिल को शरीर में खून पहुंचाने के लिए सामान्य से कई गुना अधिक मेहनत करनी पड़ती है।
- इसका सीधा असर दिल की मांसपेशियों पर पड़ता है और वे कमजोर होने लगती हैं।
- लंबे समय तक यह स्थिति बने रहने पर हार्ट फेलियर या हार्ट अटैक का खतरा बेहद बढ़ जाता है।
शुरुआत में नहीं दिखते लक्षण, बाद में आती हैं ये दिक्कतें
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बीमारी की शुरुआत बेहद साइलेंट होती है, यानी शुरुआती चरण में कोई लक्षण नजर नहीं आते। लेकिन जैसे-जैसे वॉल्व सिकुड़ता है, मरीज में ये लक्षण दिखने लगते हैं:
- बिना ज्यादा काम किए जल्दी थकान होना।
- सीने में भारीपन या दर्द महसूस होना।
- थोड़ा चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलना।
- अचानक चक्कर आना या आंखों के आगे अंधेरा छाना।
- शारीरिक मेहनत करने में परेशानी होना।
बचाव ही एकमात्र इलाज: अभी कोई दवा नहीं
अध्ययन में एक और चिंताजनक बात सामने आई है कि एक बार अगर एओर्टिक वॉल्व स्टेनोसिस बढ़ जाए, तो इसे पूरी तरह ठीक करने के लिए फिलहाल कोई दवा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में ‘प्रिवेंशन इज बेटर दैन क्योर’ (बचाव ही इलाज है) का नियम ही काम आता है। मसूड़ों की शुरुआती बीमारी का इलाज कराकर ही दिल को सुरक्षित रखा जा सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह: इन 6 बातों का रखें खास ख्याल
- दो बार ब्रश: दिन में कम से कम दो बार (सुबह और रात को सोने से पहले) ब्रश जरूर करें।
- फ्लॉसिंग: दांतों के बीच फसे बैक्टीरिया को साफ करने के लिए फ्लॉस या इंटरडेंटल ब्रश का इस्तेमाल करें।
- डेंटिस्ट से मिलें: मसूड़ों से लगातार खून आने या सूजन होने पर तुरंत डेंटिस्ट को दिखाएं।
- व्यसनों से दूरी: धूम्रपान (Smoking) और तंबाकू के सेवन से पूरी तरह तौबा कर लें।
- शुगर कंट्रोल: मधुमेह (Diabetes) के मरीज अपने ब्लड शुगर लेवल को हमेशा नियंत्रण में रखें।
- सही डाइट: अपने भोजन में विटामिन C और कैल्शियम से भरपूर चीजों को शामिल करें ताकि मसूड़े और दांत मजबूत रहें।











