पठानकोट: दूसरे दिन भी जारी रही नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल, सरकार को आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी
पठानकोट: पठानकोट नगर निगम में अपनी मांगों को लेकर सफाई कर्मचारियों और सीवरमैनों की हड़ताल दूसरे दिन भी पूरी तरह जारी रही। अखिल भारतीय सफाई मजदूर यूनियन के बैनर तले कर्मचारियों ने पंजाब सरकार और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और रोष प्रदर्शन किया। यूनियन नेताओं का आरोप है कि सरकार और नगर निगम प्रशासन लगातार उनकी अनदेखी कर रहा है, जिससे कर्मचारियों में भारी रोष है।

- बिना शर्त पक्का करने की मांग: लंबे समय से कॉन्ट्रैक्ट (ठेके) पर काम कर रहे सफाई कर्मचारियों को बिना किसी शर्त के तुरंत रेगुलर (पक्का) किया जाए।
- आउटसोर्स कर्मचारियों को राहत: आउटसोर्सिंग पर तैनात कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्ट पर लाया जाए और उन्हें राहत प्रदान की जाए।
- समय पर वेतन का भुगतान: कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा है, जिससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
- 300 कर्मचारियों की फाइल अटकी: यूनियन नेताओं ने बताया कि पंजाब सरकार की ओर से करीब 300 कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्ट पर लेने की मंजूरी पांच महीने पहले ही मिल चुकी है, लेकिन नगर निगम अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता के कारण आज तक इन्हें कॉन्ट्रैक्ट पर नहीं लिया गया।
- तेल के पैसे न होने से गाड़ियां ठप: प्रदर्शनकारियों ने खुलासा किया कि निगम की आर्थिक स्थिति इतनी खस्ताहाल है कि सफाई वाहनों में डालने के लिए तेल तक के पैसे नहीं हैं। पेट्रोल पंप संचालक का करीब ₹3 से ₹3.5 करोड़ का बकाया है, जिसके कारण तेल मिलना बंद हो गया है और शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप:
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे यूनियन नेताओं ने जॉइंट कमिश्नर पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे केवल दो दिन के लिए आते हैं, अपना काम करते हैं और चले जाते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कर्मचारियों को वेतन मिल रहा है या नहीं, इससे उन्हें कोई सरोकार नहीं है।
“हम सरकार को चेतावनी देते हैं कि यदि हमारी जायज मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और पंजाब सरकार की होगी।” > — यूनियन पदाधिकारी
इस हड़ताल के कारण शहर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लग गए हैं और सीवरेज की समस्या भी गहराने लगी है। कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित सहमति नहीं बनती, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे।










