नगर निगम कर्मचारियों का अपनी मांगों को लेकर पठानकोट में तीखा विरोध प्रदर्शन

पठानकोट: पठानकोट नगर निगम कार्यालय के बाहर आज उस समय माहौल गरमा गया जब अपनी मांगों को लेकर सफाई कर्मचारियों, सीवरमैन और ड्राइवरों की यूनियनों ने पंजाब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर निगम कार्यालय के गेट पर धरना प्रदर्शन किया और पंजाब की भगवंत मान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस विरोध प्रदर्शन के कारण शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और सड़कों पर लंबा जाम लग गया।
”मजबूरी में उतरे हैं सड़कों पर, यह हमारा शौक नहीं”
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे ऑल इंडिया सफाई मजदूर यूनियन के प्रधान रमेश कट्टो ने अपनी भड़ास निकालते हुए कहा:
”बार-बार अपनी मांगों के लिए हमें गेट पर खड़ा होना पड़ता है। यह हमारा शौक नहीं बल्कि मजबूरी है। हम सरकार से मांग करते हैं कि जो कॉन्ट्रैक्ट (ठेके) पर काम कर रहे कर्मचारी हैं, उन्हें बिना शर्त पक्का किया जाए। वहीं, आउटसोर्सिंग पर तैनात कर्मचारियों को केवल ₹10,000 प्रति माह मिल रहे हैं। इतनी कम रकम में आज के दौर में घर का गुजारा करना बेहद मुश्किल है।”

उन्होंने आगे कहा कि कर्मचारियों ने पूरे मन से सरकार बनाने में साथ दिया था कि वे उनके हकों की रक्षा करेंगे, लेकिन करीब साढ़े चार साल बीत जाने के बाद भी सफाई सेवकों और सीवरमैनों की कोई सुध नहीं ली गई है।
यूनियन नेताओं की दोटूक: ‘मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा संघर्ष’
- सफाई कर्मचारी यूनियन के वाइस चेयरमैन रोशन मल्होत्रा ने कहा कि कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है और प्रोविडेंट फंड (PF) व अन्य मुद्दे भी लंबे समय से लटके हुए हैं। 15 से 20 सालों से कच्चे काम कर रहे कर्मचारियों को तुरंत पक्का किया जाना चाहिए।
- सीवरमैन यूनियन के चेयरमैन सुनील कुमार ने पंजाब सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार के साथ हमारे नेताओं की कई बार बैठकें हुईं, लेकिन केवल झूठे आश्वासन ही मिले। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक सरकार की ओर से लिखित में कोई ठोस नोटिफिकेशन जारी नहीं किया जाता, तब तक उनका यह धरना समाप्त नहीं होगा; चाहे उन्हें सड़कें ही क्यों न जाम करनी पड़ें।

शहर में लगा लंबा जाम, बढ़ीं मुश्किलें
कर्मचारियों द्वारा अपनी गाड़ियों को मुख्य सड़कों पर आड़ा-तिरछा खड़ा कर देने के कारण शहर में चारों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे शहर में गंदगी का ढेर नहीं लगाना चाहते, लेकिन सरकार के ढुलमुल रवैये ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए विवश किया है।
यूनियनों ने साफ तौर पर कहा है कि यदि जल्द ही उनकी जायज मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह संघर्ष और भी उग्र रूप ले लेगा।








