हिमाचल की वन संपदा पर डाका: 100 किमी का सफर तय कर पंजाब जा रहे अवैध लकड़ी से लदे 2 ट्रक इंदौरा में जब्त; विभागीय सतर्कता पर उठे गंभीर सवाल
- बड़ी कामयाबी: बारिश और रात के अंधेरे का फायदा उठाकर पंजाब सीमा पार करने की फिराक में थे तस्कर।
- बरामदगी: तिरपाल से ढके दो ट्रकों में भरी थी विभिन्न प्रजातियों की बेशकीमती अवैध लकड़ी।
- बड़ा सवाल: पालमपुर से इंदौरा तक 100 किलोमीटर का सफर तय कर कैसे पहुंचे ट्रक? क्यों नहीं जागा कोई बैरियर या पुलिस थाना?
- नया मोड़: डीएफओ पालमपुर का दावा—”हमारे क्षेत्र में कोई अवैध कटान ही नहीं हुआ”, आरोपियों के बयान पर गहराया सस्पेंस।
इंदौरा (कांगड़ा)
हिमाचल प्रदेश की बेशकीमती वन संपदा को लूटकर पड़ोसी राज्य पंजाब ले जाने की वन माफिया की एक बड़ी और सुनियोजित साजिश को इंदौरा वन विभाग ने नाकाम कर दिया है। विभाग ने तत्परता दिखाते हुए अवैध लकड़ी से लदे दो बड़े मालवाहक ट्रकों को जब्त करने में सफलता हासिल की है। हालांकि, इस बड़ी कामयाबी के साथ ही कांगड़ा जिले की सुरक्षा व विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सवाल यह है कि आखिर ये ट्रक पालमपुर से करीब 100 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके इंदौरा तक कैसे पहुंच गए और रास्ते में किसी भी सुरक्षा एजेंसी या वन विभाग के बैरियर ने इन्हें रोकने की कोशिश क्यों नहीं की?

भारी बारिश और रात के अंधेरे में नाकाबंदी, टीम ने फेरा पानी
मिली जानकारी के अनुसार, वन माफिया मौसम के मिजाज का फायदा उठाने की कोशिश में था। तस्करों को लगा कि रात के अंधेरे और भारी बारिश के बीच विभाग की चौकसी ढीली होगी। लेकिन वन परिक्षेत्र अधिकारी अब्दुल हमीद के नेतृत्व में कंडवाल नाके पर तैनात टीम पूरी मुस्तैदी से डटी रही।
इस जांबाज टीम में शामिल थे:
- संजय कुमार (वन खंड अधिकारी)
- सुनील सिंह व अंकित शर्मा (वन रक्षक)
- चंद्र कुमार (वन कर्मी)
- रजत (वन मित्र)
चैकिंग के दौरान टीम ने तिरपाल से ढके दो ट्रकों (HP 74B-6767 और HP 37F-9727) को रोका। जब तिरपाल हटाई गई, तो अंदर विभिन्न प्रजातियों की बेशकीमती लकड़ी देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए।
कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखा पाए चालक
नाके पर रोके गए दोनों ट्रकों के चालकों से जब लकड़ी के कटान और परिवहन (टीडी/परमिट) से जुड़े वैध दस्तावेज मांगे गए, तो वे कोई भी कागज पेश नहीं कर सके। प्रारंभिक पूछताछ में चालकों ने कबूल किया कि वे यह लकड़ी पालमपुर के डरोह क्षेत्र से लोड करके पंजाब ले जा रहे थे। दस्तावेज न होने पर विभाग ने तुरंत दोनों गाड़ियों को कब्जे में ले लिया और उन्हें वन परिक्षेत्र कार्यालय इंदौरा (भदरोया) पहुंचा दिया गया है।
“मामले की जड़ तक जाने के लिए वन मंडल अधिकारी (डीएफओ) नूरपुर के माध्यम से डीएफओ पालमपुर से पत्राचार किया जा रहा है। जांच की जा रही है कि यह लकड़ी सरकारी वन भूमि से काटी गई है या निजी भूमि से। सरकारी भूमि की लकड़ी होने पर तुरंत एफआईआर दर्ज कर मामला कोर्ट भेजा जाएगा और निजी भूमि की होने पर भी भारी जुर्माना वसूला जाएगा।”
— अब्दुल हमीद, आरओ, इंदौरा

सवाल: 100 किलोमीटर के सफर में क्यों सोई रहीं सुरक्षा एजेंसियां?
इस पूरे मामले ने प्रशासन और खुफिया तंत्र की चौकसी को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पालमपुर के डरोह से इंदौरा की दूरी 100 किलोमीटर से भी अधिक है। इस लंबे मार्ग में कई पुलिस थाने, चौकियां, ट्रैफिक बैरियर और वन विभाग के नाके आते हैं। इतने भारी-भरकम ट्रकों का बेरोकटोक सीमा तक पहुंच जाना किसी बड़ी लापरवाही या विभागीय मिलीभगत की ओर इशारा करता है। यदि इंदौरा की टीम मुस्तैदी न दिखाती, तो हिमाचल की यह हरी संपदा आसानी से पंजाब की मंडियों में बिक चुकी होती।
डीएफओ पालमपुर के बयान से उलझा मामला: क्या झूठ बोल रहे हैं आरोपी?
इस मामले में सबसे बड़ा सस्पेंस पालमपुर के वन मंडल अधिकारी डीएफओ डॉ. संजीव शर्मा के बयान से पैदा हो गया है। उनका साफ कहना है कि पालमपुर वन मंडल के अंतर्गत आने वाले डरोह क्षेत्र में अवैध कटान का कोई भी मामला सामने नहीं आया है।
अब इस बयान ने दो बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं:
- क्या पकड़े गए आरोपी चालक सुरक्षा एजेंसियों को गुमराह करने और लकड़ी के असली उद्गम स्थल को छिपाने के लिए अपनी लोकेशन को लेकर झूठ बोल रहे हैं?
- या फिर पालमपुर वन विभाग की नाक के नीचे इतना बड़ा अवैध कटान हो गया और स्थानीय अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी?
बहरहाल, इन सवालों का असली जवाब अब दोनों वन मंडलों (नूरपुर और पालमपुर) की संयुक्त और गहन जांच के बाद ही सामने आ पाएगा।









