चंबा मेडिकल कॉलेज उत्पीड़न मामला: शिकायतकर्ता महिलाओं ने बदला यू-टर्न, कहा- ‘बरगलाकर दिलवाए गए थे झूठे बयान’

पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा में बीते दिनों हुए कथित उत्पीड़न मामले में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। लगभग एक महीने पहले जिस मामले में जिला पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था, अब उसी मामले की शिकायतकर्ता सफाई कर्मचारी महिलाओं ने अपनी ही शिकायत को झूठा करार दे दिया है।
मंगलवार को करीब आधा दर्जन पीड़ित सफाई कर्मचारी महिलाओं ने जिला पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचकर एसपी को एक नई लिखित दरख्वास्त सौंपी। महिलाओं ने पुलिस प्रशासन के समक्ष दावा किया कि उन्हें कुछ स्थानीय लोगों द्वारा गुमराह किया गया था और दबाव में आकर उन्होंने झूठे बयान दर्ज करवाए थे।

साजिश के तहत फंसाने का आरोप
SP कार्यालय के बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिकायतकर्ता महिलाओं ने साफ तौर पर कहा कि मेडिकल कॉलेज में ही कार्यरत कुछ अन्य लोग पाठक नामक आरोपी से व्यक्तिगत रंजिश रखते थे। वे नहीं चाहते थे कि वर्षों से वहां ईमानदारी से काम कर रहा यह व्यक्ति आगे भी अपनी सेवाएं दे। महिलाओं के मुताबिक, उन्हीं लोगों ने उन्हें बरगलाया और पाठक को फंसाने के लिए उत्पीड़न का मनगढ़ंत आरोप लगाने पर मजबूर किया।
’साहब! हमसे गलती हुई, वो बेकसूर है’
शिकायतकर्ता महिला का बयान (बाइट अंश): “हमें कॉलेज के ही कुछ लोगों ने बहला-फुसलाकर पाठक जी के खिलाफ बोलने को कहा था। हमें नहीं पता था कि बात इतनी बढ़ जाएगी और उन्हें जेल जाना पड़ेगा। वे बेकसूर हैं और हमसे गलती हुई है। इसीलिए आज हम सब खुद अपनी मर्जी से एसपी साहब के पास आए हैं ताकि सच सामने आ सके और बेगुनाह को इंसाफ मिले।”

पुलिस के सामने अब नई चुनौती
गौरतलब है कि एक महीने पहले जब यह मामला सामने आया था, तब पुलिस ने महिलाओं के बयानों को कलमबद्ध कर त्वरित कार्रवाई की थी और दोनों आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया था। लेकिन अब शिकायतकर्ताओं के इस यू-टर्न ने पुलिस विभाग के सामने भी असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।
अब देखना यह होगा कि इस लिखित दरख्वास्त और महिलाओं के नए बयानों के बाद पुलिस प्रशासन इस संवेदनशील मामले में क्या कानूनी रुख अपनाता है और झूठी शिकायत की साजिश रचने वाले मुख्य किरदारों पर क्या कार्रवाई की जाती है।








