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AMI News Ground Report: पठानकोट में अधूरे पुल से हर दिन मौत का सफर; प्रशासन की सुस्ती से भड़की जनता, जल्द निर्माण की मांग

पठानकोट: अधूरे पुल से हर दिन जोखिम, जल्द निर्माण की जनता ने की मांग

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  • ​स्टेडियम के पास का पुल लंबे समय से जर्जर और अधूरा; प्रशासन की लापरवाही उजागर।
  • ​जुगियाल, शाहपुरकंडी के छात्रों, खिलाड़ियों और राहगीरों को जान जोखिम में डालकर पार करनी पड़ रही खड्ड।
  • ​पूर्व में खड्ड में गिर चुकी हैं दो युवतियां, भारी बारिश से बाढ़ की स्थिति पैदा होने का डर।

पठानकोट:  पठानकोट के स्टेडियम के पास स्थित मुख्य पुल का निर्माण कार्य अधर में लटके होने के कारण स्थानीय निवासियों, राहगीरों और विद्यार्थियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार जारी मानसूनी बारिश के इस सीजन में लोग रोजाना जान जोखिम में डालकर इस मार्ग को पार करने के लिए मजबूर हैं। प्रशासन द्वारा समय रहते उचित कदम न उठाए जाने के कारण स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है।

​प्रशासन के दावों की खुली पोल, नहीं किए पुख्ता इंतजाम

​गौरतलब है कि बीते दिनों आई बाढ़ के कारण इस क्षेत्र में कई मकान ढह गए थे और उनकी नींव तक पूरी तरह खिसक गई थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने बाढ़ की विभीषिका से सबक लेने के बावजूद इस बार भी सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं। बार-बार चेतावनी दी जा रही है कि लोग बाढ़ संभावित क्षेत्रों से दूर रहें, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जनता इस अधूरे पुल के कारण आखिर जाए तो कहाँ जाए?

​कछुआ गति से चल रहा निर्माण कार्य

​स्थानीय लोगों के अनुसार, इस पुल का निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। कार्य की रफ्तार को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही है कि इस पुल का निर्माण बारिश का मौसम बीत जाने के बाद ही पूरा हो पाएगा। इस मार्ग से जुगियाल, शाहपुरकंडी और आसपास के अन्य इलाकों से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कॉलेज आते हैं, साथ ही खिलाड़ी और खेल प्रेमी स्टेडियम पहुँचते हैं। पुल न होने की वजह से इन सभी को अपनी जान हथेली पर रखकर निकलना पड़ता है।

​खड्ड के पत्थरों और मलबे से गुजर रहे दोपहिया वाहन

वर्तमान में स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि दोपहिया वाहन चालकों को खड्ड के गहरे गड्ढों, मलबे और पत्थरों के बीच से होकर बाइक और स्कूटी निकालनी पड़ रही है। जरा सी चूक किसी बड़े हादसे को दावत दे सकती है।

​क्या कहते हैं स्थानीय निवासी?

  • ​राजन कुमार: “हमारे हिसाब से इस पुल का निर्माण बारिश के मौसम से पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था। गाँव के लोग और कॉलेज जाने वाले बच्चे इस अधूरे काम की वजह से बेहद परेशान हैं। हर दिन यहाँ से गुजरना एक बड़ी मुश्किल बन चुका है।”
  • ​नरेंद्र सिंह: “अगर प्रशासन को काम करना ही था, तो इसे दो-तीन महीने पहले शुरू करके समय पर मुकम्मल कर देना चाहिए था। अब इस स्थिति में लोगों को बहुत परेशानी आ रही है। लेबर (मजदूरों) की संख्या बढ़ाकर इस काम को तुरंत युद्ध स्तर पर पूरा किया जाना चाहिए, ताकि छोटे बच्चों, महिलाओं और कामकाजी लोगों को राहत मिल सके।”
  • ​रविंद्र कुमार: “यह पुल काफी लंबे समय से टूटा हुआ है। पिछली बार जब यहाँ सिर्फ स्लैब जैसी व्यवस्था की गई थी, तब एक्टिवा सवार दो लड़कियां इस गहरी खड्ड में गिर गई थीं। गनीमत रही कि समय रहते उनका रेस्क्यू कर उन्हें सकुशल बचा लिया गया। बारिश में पानी बढ़ने पर यहाँ रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है।”

​जल्द समाधान की गुहार

​स्थानीय जनता ने सरकार और संबंधित विभाग से पुरजोर मांग की है कि पुल के निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए तुरंत अतिरिक्त लेबर लगाई जाए। मानसून के इस सीजन में किसी भी बड़ी अनहोनी या हादसे से बचने के लिए इस पुल का जल्द से जल्द बनना अनिवार्य है, ताकि लोगों का आवागमन सुचारू और सुरक्षित हो सके।

Ami News
Author: Ami News

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