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पठानकोट में ट्रैफिक लाइट्स की ‘रियलिटी ज़ीरो’: जान जोखिम में डाल सफर करने को मजबूर शहरवासी — AMI News

पठानकोट में ट्रैफिक लाइट्स की ‘रियलिटी ज़ीरो’: जान जोखिम में डाल सफर करने को मजबूर शहरवासी

पठानकोट: शहर के सबसे व्यस्ततम और मुख्य चौराहों पर ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह से भगवान भरोसे चल रही है। प्रशासन की नाकामी का आलम यह है कि शहर के प्रमुख चौराहों पर या तो ट्रैफिक लाइट्स हैं ही नहीं, और जहां हैं, वे सिर्फ सफेद हाथी साबित हो रही हैं। ‘एएमवाई न्यूज़’ (AMY News) की ग्राउंड रियलिटी रिपोर्ट के मुताबिक, पठानकोट के कम से कम 4 से 5 ऐसे इलाके हैं जहां हर समय लोगों की जान गले में अटकी रहती है।

​नीचे दी गई रिपोर्ट में इन खस्ताहाल चौराहों की पूरी सच्चाई बयां की गई है:

​१. सिंबल चौक (Thimmal / Simble Chowk)

​यह एक ऐसा मुख्य चौराहा है जहां से हिमाचल प्रदेश और डलहौजी रोड के लिए 24 घंटे बसों, दुपहिया और चौपहिया वाहनों की भारी आवाजाही रहती है। नेशनल हाईवे (NH) होने के कारण यहाँ ट्रैफिक लाइट्स का होना बेहद जरूरी है, लेकिन जमीनी हकीकत में यहाँ ट्रैफिक लाइट्स की ‘रियलिटी ज़ीरो’ है। आए दिन यहाँ वाहन आपस में टकराते रहते हैं और छोटे-मोटे हादसों का खतरा हमेशा मंडराता रहता है।

​२. लाइटों वाला चौक और ममुन चौक

​नाम ‘लाइटों वाला चौक’ है, लेकिन यहाँ लगी लाइट्स केवल एक ‘हाथी का दांत’ बनकर रह गई हैं। प्रशासन द्वारा लगाई गई ये लाइटें सालों से बंद पड़ी हैं। यही हाल ममुन चौक का भी है। इन दोनों ही जगहों पर चारों तरफ से भारी ट्रैफिक आता है और ‘पीक आवर्स’ (व्यस्त समय) में स्थिति इतनी बेकाबू हो जाती है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

​३. चक्की पुल चौराहा

​चक्की पुल से जालंधर, चंडीगढ़ और पठानकोट के लिए लगातार बड़ी-बड़ी बसें और वोल्वो गाड़ियां गुजरती हैं। एसएसपी की नई अधिसूचना के बाद भी यहाँ बसों का अवैध ठहराव जारी है, जिससे लगातार जाम की स्थिति बनी रहती है। हाईवे होने की वजह से वाहनों की रफ्तार काफी तेज होती है, जिससे यह एरिया ‘ब्लैक स्पॉट’ और दुर्घटना संभावित क्षेत्र (Accident Prone Area) बन चुका है। इसके बावजूद यहाँ लाइट्स का नामोनिशान तक नहीं है।

​४. मलिकपुर चौक

​मलिकपुर चौक को पठानकोट का सबसे व्यस्ततम इलाका माना जाता है। यहाँ से अमृतसर, गुरदासपुर और पठानकोट के रूट की गाड़ियां और भारी ट्रक गुजरते हैं। नेशनल हाईवे होने के कारण यहाँ वाहनों की रफ्तार 80 से 90 किमी/घंटा तक होती है। बिना ट्रैफिक लाइट्स के इस चौराहे को पार करना किसी खतरे से खाली नहीं है, लेकिन प्रशासन आँखें मूंद कर सोया हुआ है।

​५. कमल स्वीट्स चौराहा (सैली रोड/हिमाचल मार्ग)

​कमल स्वीट्स वाला चौराहा पठानकोट का सबसे बड़ा एक्सीडेंटल प्रोन एरिया (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) बन चुका है। व्यस्त समय में चारों तरफ से आने वाले ट्रैफिक के कारण यहाँ भयंकर जाम लगता है। लाइट्स न होने के कारण गाड़ियां आपस में टकराती हैं और वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ जाता है।

जनता का सवाल: कब जागेगा प्रशासन?

हमारा मकसद प्रशासन को केवल टारगेट करना नहीं है, बल्कि समय रहते उन्हें जगाना है ताकि कल को कोई बड़ा हादसा न हो। आखिर पठानकोट की जनता को सुरक्षित सड़कें कब मिलेंगी? इसका जवाब सिर्फ हमारा प्रशासन ही दे सकता है।

Ami News
Author: Ami News

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