सुक्खू कैबिनेट में बड़े फेरबदल के संकेत: मानसून सत्र से पहले दो नए चेहरों को मिल सकती है जगह
* धर्मशाला में 16-17 जुलाई को कांग्रेस ‘पॉलिटिकल अफेयर कमेटी’ की बड़ी बैठक; के.सी. वेणुगोपाल रहेंगे मौजूद
* शिमला संसदीय क्षेत्र के एक मौजूदा मंत्री की हो सकती है छुट्टी, मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव की चर्चा

, शिमला/धर्मशाला हिमाचल प्रदेश विधानसभा के आगामी मानसून सत्र से पहले प्रदेश की सियासत में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के मंत्रिमंडल में बड़े बदलाव और विस्तार के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। इस सियासी फेरबदल की रूपरेखा तय करने के लिए आगामी 16 और 17 जुलाई को धर्मशाला में कांग्रेस की ‘पॉलिटिकल अफेयर कमेटी’ की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल विशेष रूप से मौजूद रहेंगे, जहां मंत्रिमंडल विस्तार, मंत्रियों के परफॉर्मेंस और आगामी रणनीति पर अंतिम मुहर लगेगी।
एक की छुट्टी, दो नए चेहरों की होगी एंट्री!
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में सुक्खू मंत्रिमंडल में एक मंत्री पद खाली चल रहा है। इसके साथ ही, क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को साधने के लिए शिमला संसदीय क्षेत्र से संबंध रखने वाले एक मौजूदा मंत्री को कैबिनेट से बाहर (ड्रॉप) किया जा सकता है। इस कटौती के बाद कैबिनेट में दो नए चेहरों को शामिल किए जाने की प्रबल संभावना है।
इन नामों पर टिकी हैं निगाहें:
मंत्री पद की इस दौड़ में ज्वालामुखी के विधायक संजय रत्न और पालमपुर के विधायक आ आशीष बुटेल का नाम सबसे आगे चल रहा है। वहीं, कुल्लू जिले से वरिष्ठ विधायक सुंदर सिंह ठाकुर को भी मंत्रिमंडल में शामिल करने की चर्चाएं जोरों पर हैं।

डिप्टी स्पीकर पद पर भी होगी ताजपोशी
मंत्रिमंडल विस्तार के साथ-साथ लंबे समय से खाली चल रहे विधानसभा उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) के पद को भी इस मानसून सत्र से पहले भर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, कई मौजूदा मंत्रियों के विभागों में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है, जिससे सरकार के कामकाज में और तेजी लाई जा सके।

डेढ़ साल का कार्यकाल शेष; संतुलन बनाने पर जोर
गौरतलब है कि सुक्खू सरकार अपने कार्यकाल के तीन साल से अधिक का समय पूरा कर चुकी है। अब सरकार के पास लगभग डेढ़ साल की शेष अवधि बची है, जिसे बेहद अहम माना जा रहा है। यही वजह है कि आगामी मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों में क्षेत्रीय (Regional) और जातीय (Caste) संतुलन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि आगामी चुनावों से पहले सभी समीकरणों को दुरुस्त किया जा सके।








