सरकारी जमीन पर ‘अवैध’ बसेरा; वन विभाग की भूमि पर कब्जा कर बनाई झुग्गियां

पठानकोट, ४ जुलाई (AMI News): स्थानीय ढलोजी रोड पर स्थित नेचर्स पार्क के समीप वन विभाग की सरकारी भूमि पर प्रवासी मजदूरों द्वारा ‘अवैध’ रूप से झुग्गियां बनाकर कब्जा करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। एएमआई न्यूज (AMI News) की टीम ने जब इस क्षेत्र का जमीनी दौरा किया, तो कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए।

सुरक्षा तारों को काटकर बनाया निजी रास्ता
जांच में सामने आया है कि वन विभाग द्वारा अपनी भूमि की सुरक्षा के लिए जो कंटीली तारें (बाउंड्री वॉल) लगाई गई थीं, उन्हें काटकर इन झुग्गी-झोपड़ी वालों ने अपना निजी गेट और रास्ता तैयार कर लिया है। हालांकि, वहां रह रहे लोगों का दावा है कि ये तारें मौसम और पेड़ गिरने के कारण टूटी हैं, लेकिन परिस्थितियों को देखकर साफ पता चलता है कि यहाँ लंबे समय से अतिक्रमण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

लुधियाना के आधार कार्ड, पठानकोट में बसेरा
हैरानी की बात यह है कि यहाँ रह रहे प्रवासी मजदूरों के पास लुधियाना के पते वाले आधार कार्ड हैं। पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि लुधियाना में उन्हें सरकारी मकान भी मिले हुए हैं, लेकिन वहां काम न होने के कारण वे पठानकोट आकर सरकारी जमीनों पर काबिज हो गए हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पठानकोट के ही कुछ निवासियों ने इन्हें यहाँ रहने के लिए अनधिकृत रूप से स्थान मुहैया कराया है।

विभागों की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल
पिछले २० से ३० वर्षों से चल रहे इस अवैध कब्जे को लेकर अब वन विभाग, नगर निगम (कॉरपोरेशन) और नहर विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इतने वर्षों में कई बार आला अधिकारी और कर्मचारी इस मार्ग से गुजरे, लेकिन किसी ने भी इस पर सख्त शिकंजा कसने की जहमत नहीं उठाई। क्या इन सरकारी विभागों की इस मिलीभगत के पीछे कोई बड़ा घालमेल है, यह जांच का विषय है।

स्थानीय रेहड़ी वालों और प्रवासियों में दोहरा मापदंड क्यों?
एक ओर जहाँ इन अवैध कब्जाधारियों से कोई टैक्स या पर्ची नहीं काटी जा रही, वहीं दूसरी ओर पठानकोट के स्थायी निवासी जो अपने रोजगार के लिए रेहड़ी-फड़ी लगाते हैं, उनसे नगर निगम (Nagar Nigam) द्वारा बकायदा हर महीने २०० से ३०० रुपये की तहबाजारी पर्ची काटी जाती है। इस दोहरे रवैये को लेकर स्थानीय दुकानदारों और छोटे व्यापारियों में गहरा रोष है। उनका कहना है कि शहर की सुरक्षा को ताक पर रखकर इन प्रवासियों को शह दी जा रही है।
इस विषय पर पक्ष जानने के लिए जब वन विभाग (पठानकोट) के संबंधित अधिकारियों और गार्ड से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो शनिवार होने के कारण वे उपलब्ध नहीं हो सके। एएमआई न्यूज जल्द ही इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष भी जनता के सामने लेकर आएगा।








