वेब स्टोरी

ई-पेपर

लॉग इन करें

AMI News विशेष: नूरपुर में छिड़ा सियासी संग्राम: अपनों से मिलेगी चुनौती या विपक्ष से होगा वार? 2027 की पटकथा तैयार

नूरपुर में छिड़ा सियासी संग्राम: अपनों से चुनौती या विपक्ष से वार? 2027 की पटकथा तैयार

 नूरपुर (पठानकोट) हिमाचल प्रदेश की शांत वादियों में बसे नूरपुर की राजनीति में एक ऐसा संग्राम शुरू हो चुका है, जिसकी गूंज साल 2027 के विधानसभा चुनावों तक सुनाई देगी। नूरपुर की यह लड़ाई अब सिर्फ कांग्रेस बनाम भाजपा की नहीं रह गई है, बल्कि सबसे बड़ा सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि क्या भाजपा को असली चुनौती विपक्ष से मिलेगी या फिर अपने ही घर से?

​2022 का इतिहास और बदला समीकरण

​साल 2022 का विधानसभा चुनाव नूरपुर में पूरी तरह भाजपा के रंग में रंगा था। भाजपा प्रत्याशी रणवीर सिंह निक्का ने कांग्रेस के दिग्गज नेता अजय महाजन को करीब 18,000 वोटों के भारी अंतर से शिकस्त देकर एक ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। उस समय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि अगले 10 सालों तक नूरपुर में भाजपा अजेय है। लेकिन राजनीति में 24 घंटे का समय भी बहुत बड़ा होता है, ऐसे में 5 साल तो बहुत दूर की बात है।

​राकेश पठानिया की घर वापसी के संकेत, सोशल मीडिया पर ‘टाइगर इज बैक’

​रणवीर सिंह निक्का की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे नूरपुर की राजनीति का एक और बड़ा चेहरा था—राकेश पठानिया, जो प्रदेश सरकार में वन मंत्री रह चुके हैं। साल 2022 में भाजपा ने रणनीति के तहत उनका टिकट बदलकर उन्हें फतेहपुर भेज दिया था, जहाँ वे चुनाव हार गए। यहीं से नूरपुर की एक नई सियासी स्क्रिप्ट लिखी जाने लगी।

​अब जैसे-जैसे 2027 नजदीक आ रहा है, राकेश पठानिया के नूरपुर लौटने के संकेत साफ मिलने लगे हैं। उनके समर्थकों द्वारा सोशल मीडिया पर ‘टाइगर इज बैक’ और ‘घर वापसी’ के पोस्टर्स लगातार वायरल किए जा रहे हैं, जिसने नूरपुर का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है।

​निक्का का दावा भी मजबूत: विकास के दावों पर छिड़ी बहस

​दूसरी तरफ, नूरपुर के वर्तमान विधायक रणवीर सिंह निक्का भी खामोश नहीं बैठे हैं। उनके पास रिकॉर्ड मतों से जीत का टैग, संगठन पर मजबूत पकड़ और चुनावी संसाधनों की ताकत है। अगर भाजपा आगामी चुनाव में केवल ‘जीत का गणित’ देखती है, तो टिकट पर पहला दावा आज भी निक्का का ही बनता है।

​हालांकि, जनता के बीच विकास कार्यों को लेकर बहस छिड़ चुकी है। एक पक्ष का आरोप है कि राज्य में कांग्रेस की सरकार होने के कारण नूरपुर का विकास थमा है, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि वादे ज्यादा हुए और जमीनी काम कम।

​क्या त्रिकोणीय मुकाबले से कांग्रेस को होगा फायदा?

​नूरपुर की सियासत में अब सबसे बड़ा ट्विस्ट यह है कि यदि भाजपा दोबारा रणवीर सिंह निक्का को मैदान में उतारती है, तो क्या राकेश पठानिया निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोकेंगे? यदि ऐसा हुआ, तो भाजपा का पारंपरिक वोट बैंक दो धड़ों में बंट जाएगा। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि भाजपा के भीतर की इस गुटबाजी का सीधा फायदा विपक्षी दल कांग्रेस को मिल सकता है।

​सोशल मीडिया पर ‘पोस्टर वॉर’ और नया युवा चेहरा

​इन सब के बीच, सोशल मीडिया पर एक नया युवा चेहरा भी उभर रहा है, जो दोनों ही भाजपा नेताओं पर सीधे हमले बोल रहा है। सोशल मीडिया पर “तू नकली शेर, तू बूढ़ा शेर” जैसे स्लोगन तेजी से तैर रहे हैं। हालांकि, देखना यह होगा कि सोशल मीडिया की यह हवा क्या वास्तव में जमीनी स्तर पर वोट बैंक को बदलने की ताकत रखती है?

​जनता के सामने तीन रास्ते

​फिलहाल नूरपुर की जनता के सामने तीन मुख्य रास्ते दिखाई दे रहे हैं—अनुभव, वर्तमान विधायक या फिर एक बिल्कुल नया विकल्प। लोकतंत्र में अंतिम फैसला हमेशा की तरह ‘जनता जनार्दन’ का ही होगा। अब देखना यह है कि आगामी समय में नूरपुर की जनता किसे अपना असली ‘शेर’ चुनती है।

Ami News
Author: Ami News

trfgcvkj.blkjhgfd

Leave a Comment

और पढ़ें

Horoscope

Weather

और पढ़ें
error: Content is protected !!