पठानकोट: वादों के ‘गड्ढों’ में गुम हुआ ढांगू रोड, 15 सालों से विकास का इंतजार

पठानकोट: पंजाब सरकार भले ही सूबे में विश्वस्तरीय सड़कों और अभूतपूर्व विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों को पूरी तरह मुंह चिढ़ा रही है। पठानकोट का ढांगू रोड (छोटी लाइन रेलवे क्रॉसिंग, नैरो गेज रेलवे लाइन के समीप) पिछले 15 वर्षों से अपनी बदहाली के आंसू रो रहा है। प्रशासन और सरकार की अनदेखी के चलते यह सड़क अब हादसों का सबब बन चुकी है।

अमृतसर जैसी चकाचौंध, पर स्थानीय जनता बेहाल
स्थानीय निवासियों का गुस्सा इस बात पर फूट रहा है कि सरकार वीआईपी इलाकों या नई सड़कों को तो चमका रही है, लेकिन शहर की इस मुख्य लाइफलाइन की ओर किसी का ध्यान नहीं है। लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय हर राजनीतिक दल वोट बटोरने के लिए बड़े-बड़े वादे करता है, लेकिन सत्ता में आते ही सब अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। कोई कोऑर्डिनेशन या प्रॉपर मैनेजमेंट न होने के कारण स्थिति बद से बदतर हो चुकी है।
“क्या कहते हैं स्थानीय निवासी?”
- पारस (स्थानीय निवासी/दुकानदार): “मेरा घर और दुकान इसी रूट पर है। जब भी यहाँ से निकलो, गाड़ी में ऐसा बंप (झटका) लगता है कि वाहनों का भारी नुकसान होता है। स्कूटर हो या गाड़ी, हर कोई इस सड़क पर परेशान है। अब तो बरसातों का मौसम भी शुरू हो गया है और सड़कों पर पानी भरने से स्थिति जानलेवा हो चुकी है।”
- एक अन्य बुजुर्ग राहगीर: “10-15 साल से यही हाल है। इस सड़क पर कई बार बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे गिरकर गंभीर रूप से चोटिल हो चुके हैं। यहाँ के मेयर या विधायक के घर को जाने वाली सड़कें तो चकाचक हैं, लेकिन आम जनता के लिए इस टूटी सड़क पर सिर्फ राजनीति का ‘पोचा’ मारा जा रहा है।”

हादसों को न्योता देता ढांगू रोड से शहीद भगत सिंह चौक मार्ग
ढांगू रोड से लेकर शहीद भगत सिंह चौक तक का पूरा हिस्सा पूरी तरह टूट चुका है। गड्ढों के कारण आए दिन यहाँ ट्रैफिक जाम और राहगीरों का संतुलन बिगड़ने से दुर्घटनाएं आम बात हो गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को कई बार लिखित और मौखिक अपील की जा चुकी है, लेकिन कुंभकर्णी नींद सोए अधिकारी जागने का नाम नहीं ले रहे हैं।
जनता की मांग: नई सड़कों के बजाय, पहले पुरानियों को सुधारें
पठानकोट की जनता ने सरकार और स्थानीय प्रशासन को चेतावनी देते हुए मांग की है कि कागजी और झूठे विकास के दावों को छोड़कर धरातल पर काम किया जाए। बार-बार नई सड़कों का निर्माण करने के बजाय, जो पुरानी मुख्य सड़कें टूट चुकी हैं, उनका सही तरीके से और तुरंत जीर्णोद्धार किया जाए ताकि लोगों को इस नारकीय स्थिति से मुक्ति मिल सके।








