भलेई कॉलेज बंद करने पर भड़का जनता का आक्रोश, 9 जुलाई को चक्का जाम की चेतावनी
- स्थानीय लोगों, छात्रों और अभिभावकों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा; कहा- बेटियों की शिक्षा पर पड़ेगा सीधा असर
- विपक्ष ने फैसले को बताया छात्र विरोधी, क्षेत्र की जनता ने सरकार को दिया अल्टीमेटम

चंबा: जिला चंबा के भलेई डिग्री कॉलेज को बंद करने के सरकार के फैसले के खिलाफ अब स्थानीय जनता का गुस्सा पूरी तरह से फूट पड़ा है। इस फैसले के विरोध में स्थानीय निवासियों, छात्रों और अभिभावकों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो 9 जुलाई को नेशनल हाईवे (NH) पर चक्का जाम किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
बेटियों की पढ़ाई पर संकट, भविष्य अंधेरे में
भलेई और उसके आसपास की विभिन्न पंचायतों के प्रतिनिधियों व ग्रामीणों का कहना है कि कॉलेज बंद होने से सैकड़ों छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ेगा।
”सरकार शिक्षा के मंदिर पर ताला लगाने का काम कर रही है। इससे हमारे बच्चों का भविष्य अंधेरे में डूब जाएगा। खासकर ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज के इलाकों में जाना पड़ेगा, जो आर्थिक और व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।”
— स्थानीय अभिभावक व ग्रामीण

ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि सरकार ने क्षेत्र की जनता और हितधारकों से बिना कोई राय-मशविरा किए तानाशाही रवैया अपनाते हुए कॉलेज को बंद करने का फरमान सुना दिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार को 9 जुलाई तक का अल्टीमेटम देते हुए मांग की है कि कॉलेज को तुरंत बहाल किया जाए और वहां चल रही स्टाफ की कमी को जल्द से जल्द पूरा किया जाए।

फैसले पर गरमाई सियासत
भलेई कॉलेज को बंद किए जाने के मुद्दे पर जिला चंबा में सियासत भी पूरी तरह गरमा गई है। विपक्ष ने इस मुद्दे को लपकते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया है और इस फैसले को पूरी तरह ‘छात्र विरोधी’ करार दिया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का बुनियादी ढांचा मजबूत करने के बजाय बने-बनाए संस्थानों को बंद कर रही है।
अब देखना यह होगा कि 9 जुलाई की समयसीमा से पहले सरकार जनता और छात्रों के इस तीखे आक्रोश पर क्या सुधारात्मक कदम उठाती है।








