पठानकोट सिविल अस्पताल की सुरक्षा राम भरोसे, पुलिस चौकी नदारद: इमरजेंसी गेट पर सुरक्षाकर्मियों का टोटा

पठानकोट: पठानकोट के सिविल अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अस्पताल परिसर में कहने को तो पुलिस चौकी स्थापित की गई है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना, लड़ाई-झगड़े या चोरी को रोका जा सके, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। दोपहर के समय अस्पताल में किए गए एक औचक सर्वे में पूरी पुलिस चौकी से जवान गायब मिले और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आई।
चौकी बंद, ड्यूटी से नदारद मिले कर्मचारी
जब ग्राउंड जीरो पर जाकर देखा गया, तो अस्पताल की पुलिस चौकी का मुख्य दरवाजा बंद था। पूरे अस्पताल परिसर और सबसे संवेदनशील माने जाने वाले इमरजेंसी गेट पर पुलिस का एक भी जवान तैनात नहीं था।
जब इस संबंध में पुलिस चौकी के प्रभारी मोहन शर्मा से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि इस समय चौकी में केवल दो ही कर्मचारी ड्यूटी पर हैं। उन्होंने ड्यूटी का विवरण देते हुए कहा:
- एक जवान एसएमओ (SMO) ऑफिस के पास तैनात है।
- दूसरा जवान लेबर रूम (प्रसूति कक्ष) में ड्यूटी पर है।
- इमरजेंसी गेट पर सुरक्षा के लिए पेस्को (PESCO) के जवान तैनात रहते हैं।
- इसके अलावा, जवानों को नशा मुक्ति केंद्र (De-addiction Centre) में भी देखना पड़ता है, जहाँ लगभग 20 मरीज भर्ती हैं।

ऑटो-रिक्शा चालकों का आतंक, ट्रैफिक जाम से मरीज बेहाल
अस्पताल के बाहर अवैध रूप से खड़े होने वाले ऑटो-रिक्शा भी एक बड़ी समस्या बन चुके हैं। अस्पताल के मुख्य द्वार के बाहर इतनी भारी भीड़ और ऑटो जमा हो जाते हैं कि पीछे से आने वाले एम्बुलेंस या दोपहिया वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा हमेशा बना रहता है।
इस पर चौकी प्रभारी ने सफाई देते हुए कहा कि जब भी ज्यादा भीड़ होती है, तो ईवीआर (EVR) गाड़ी आकर उन्हें हटाती है और ट्रैफिक कर्मचारी चालान भी काटते हैं। उन्होंने दावा किया कि जब भी ट्रैफिक जाम होता है, पुलिस कर्मचारी उसे सुचारू रूप से खुलवाने का प्रयास करते हैं।
प्रशासन का कूटनीतिक रवैया:
पुलिस प्रशासन का कहना है कि उनकी ड्यूटी ‘रेयर’ (दुर्लभ) मौकों पर होती है और ड्यूटी इसलिए लगाई जाती है ताकि कोई इमरजेंसी न हो। लेकिन स्थानीय लोगों और मरीजों का आरोप है कि प्रशासन शायद किसी बड़ी घटना (इमरजेंसी) के होने का इंतजार करता है, जिसके बाद ही वह हरकत में आता है।

जनता से अपील
अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर सुरक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी ढिलाई प्रशासन के दावों की पोल खोलती है। इस अव्यवस्था और पुलिस के इस रवैए पर आपकी क्या राय है? हमें नीचे कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं।








