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रटना छोड़िए, समझिए: पंजाब की बाढ़ अब 9वीं के सिलेबस में; वर्कशीट मॉडल से होगी पढ़ाई

स्कूली पढ़ाई में शामिल हुई पंजाब की भीषण बाढ़, NCERT ने कक्षा 9वीं के पाठ्यक्रम में जोड़ा

रटने के बजाय ‘केस स्टडी’ और ‘वर्कशीट मॉडल’ से आपदा प्रबंधन सीखेंगे छात्र

नई दिल्ली/चंडीगढ़:  पंजाब में आई भीषण बाढ़ और उससे मची तबाही को अब स्कूली बच्चे अपनी पढ़ाई का हिस्सा बनाएंगे। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9वीं की सामाजिक विज्ञान (Social Science) की नई किताब में पंजाब की इस प्राकृतिक आपदा को एक विशेष ‘केस स्टडी’ के रूप में शामिल किया है।

​इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को यह समझाना है कि प्राकृतिक आपदाएं किस तरह आम जनजीवन, कृषि, पशुधन और बुनियादी ढांचे (सड़क-पुल) को तहस-नहस कर देती हैं।

नई किताब और अनोखा ‘वर्कशीट मॉडल’

​यह महत्वपूर्ण बदलाव कक्षा 9वीं की नई पाठ्यपुस्तक ‘Understanding Society: India and Beyond – Grade 9 Part 1’ में किया गया है। NCERT ने इस अध्याय को पारंपरिक सवाल-जवाब के ढर्रे से हटकर एक आधुनिक ‘वर्कशीट मॉडल’ के रूप में तैयार किया है। इसके तहत छात्रों को खुद रिसर्च करने और जानकारी जुटाने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे वे विषय को रटने के बजाय व्यावहारिक रूप से समझ सकें।

प्रमुख बिंदु: आखिर क्यों आई थी पंजाब में बाढ़?

  • रिकॉर्ड तोड़ बारिश: किताब के अनुसार, साल 2025 के मानसून के दौरान पंजाब में अप्रत्याशित और भारी बारिश हुई थी।
  • नदियों का उफान: अत्यधिक बारिश के कारण सतलुज, ब्यास और रावी जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया।
  • भारी नुकसान: इस बाढ़ की चपेट में आने से सैकड़ों गांव और रिहायशी इलाके डूब गए। हजारों एकड़ में खड़ी फसलें बर्बाद हो गईं, पशुधन को भारी नुकसान पहुंचा और सड़कें, पुल व सीमा पर लगी बाड़ तक क्षतिग्रस्त हो गई।
  • विस्थापन: हजारों परिवारों को अपना आशियाना छोड़कर सरकारी राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी थी।

मातृभाषा में सीखेंगे आपदा प्रबंधन (Disaster Management)

​NCERT का जोर केवल घटना को पढ़ाने पर नहीं, बल्कि छात्रों को संकट के समय प्रबंधन सिखाने पर भी है। इसके लिए अध्याय में एक विशेष गतिविधि (Activity) जोड़ी गई है। इसके तहत छात्रों को ‘डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी’ (आपदा प्रबंधन प्राधिकरण) के सुरक्षा पोस्टरों को अपनी मातृभाषा में अनुवाद करने का काम दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बच्चे स्थानीय स्तर पर आपदाओं से निपटने के प्रति अधिक जागरूक और संवेदनशील बनेंगे।

“यह केस स्टडी छात्रों में रटने की प्रवृत्ति को खत्म कर उन्हें व्यावहारिक और जागरूक नागरिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।” > — शिक्षा विशेषज्ञ

Ami News
Author: Ami News

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