पठानकोट में ‘शहर ज़िंदा करो’ मुहिम की शुरुआत, चरमराई स्वच्छता व्यवस्था पर फूटा जनता का गुस्सा

पठानकोट: पठानकोट शहर को साफ-सुथरा और सुंदर बनाने के उद्देश्य से स्थानीय समाजसेवी श्रीजल गुप्ता द्वारा ‘शहर ज़िंदा करो’ नाम से एक अनूठी मुहिम की शुरुआत की गई है। इस मुहिम के तहत शहर में फैली गंदगी और सार्वजनिक शौचालयों (वॉशरुम) की बदहाली को मुख्य मुद्दा बनाया गया है। श्रीजल गुप्ता के इस कदम को व्यापारियों और आम जनता का भारी समर्थन मिल रहा है।
दावों के उलट धरातल पर बदहाली: केवल 3 वॉशरुम चालू
मुहिम के मुख्य सूत्रधार श्रीजल गुप्ता ने प्रशासन के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पठानकोट की करीब 2 लाख की आबादी और बाहरी राज्यों (हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर) से आने वाले पर्यटकों के लिए शहर में केवल 14 सार्वजनिक शौचालय हैं, जिनमें से भी केवल 3 ही सही स्थिति में काम कर रहे हैं। बाकी के वॉशरुमों की हालत बेहद दयनीय है या वे बंद पड़े हैं। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये सफाई और रखरखाव के नाम पर खर्च करने का दावा करने वाला प्रशासन आखिर आंखें मूंद कर क्यों बैठा है?
मरीजों, महिलाओं और बच्चों को हो रही भारी परेशानी
श्रीजल गुप्ता ने इस बात पर विशेष चिंता व्यक्त की कि पठानकोट एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र है, जहाँ भारी संख्या में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग खरीदारी के लिए आते हैं। सार्वजनिक शौचालयों की कमी के कारण सबसे ज्यादा परेशानी शुगर (डायबिटीज) के मरीजों और महिलाओं को उठानी पड़ती है। उचित व्यवस्था न होने के कारण लोग सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने को मजबूर हैं, जो शहर की छवि पर एक बड़ा दाग है।

’व्यापार मंडल’ और मीडिया ने मिलाया हाथ
इस मुहिम को उस समय और मजबूती मिली जब पठानकोट के व्यापार मंडल ने कंधे से कंधा मिलाकर श्रीजल गुप्ता का साथ देने का एलान किया। व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों और स्थानीय मीडिया ने इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि शहर के रख-रखाव के लिए इस तरह की आवाज उठाना बेहद जरूरी था。
“यह कोई राजनीतिक स्टंट नहीं, बल्कि एक नागरिक का फर्ज है”
“मैं खुद एक शुगर का मरीज हूँ और इस समस्या को गहराई से समझता हूँ। मेरा मकसद राजनीति चमकाना नहीं, बल्कि अपने शहर को एक परिवार मानकर उसकी सेवा करना है। मुझे उम्मीद है कि हमारी इस आवाज को सुनकर प्रशासन जागेगा और वॉशरुमों की स्थिति में सुधार करेगा।”
— श्रीजल गुप्ता, मुख्य संचालक (‘शहर ज़िंदा करो’ मुहिम)

आम जनता से भी की अपील
इस दौरान श्रीजल गुप्ता के भाई ने भी गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि पूरे परिवार को इस बात की खुशी है कि श्रीजल ने शहर के बारे में सोचा। उन्होंने आम जनता से भी अपील की कि वे अपने वाहनों में लिफाफे रखें, बच्चों द्वारा खाए गए आइसक्रीम या पॉपकॉर्न के रैपर सड़कों पर न फेंककर डस्टबिन में ही डालें। शहर को सुंदर रखना हम सभी का साझा कर्तव्य है।
अब देखना यह होगा कि इस जन-आंदोलन के बाद स्थानीय प्रशासन नींद से जागता है या शहर की जनता को ऐसे ही मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसना पड़ेगा।








