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AMI News: अंतिम समय में शरीर देता है ये 6 गंभीर संकेत, भूलकर भी न करें नजरअंदाज

अंतिम समय में शरीर देता है ये 6 गंभीर संकेत, भूलकर भी न करें नजरअंदाज

  • ​अंतिम पड़ाव पर फेफड़ों और गले में तरल जमा होने से बदल जाती है आवाज।
  • ​अंगों के काम बंद करने से ठंडे पड़ने लगते हैं हाथ-पैर, त्वचा पर दिखते हैं नीले धब्बे।
  • ​अचानक मेडिकल इमरजेंसी या अत्यधिक खून बहने की स्थिति में ‘गोल्डन ऑवर’ है बेहद

​जब कोई इंसान बीमार पड़ता है, तो उसका शरीर अलग-अलग लक्षणों के जरिए चेतावनी देता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) की मदद से आज समय पर बीमारी का पता लगाकर उसका सटीक इलाज संभव है। लेकिन जब कोई व्यक्ति अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर होता है या किसी बेहद गंभीर और जानलेवा बीमारी से पीड़ित होता है, तो उसके शरीर में कई बड़े शारीरिक और जैविक (Biological) बदलाव आने लगते हैं।

​अक्सर लोग यह जानना चाहते हैं कि किसी इंसान का अंत नजदीक होने पर उसका शरीर कौन-कौन से मुख्य संकेत देता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि किसी भी एक दावे के आधार पर मृत्यु का सटीक समय तय नहीं किया जा सकता, लेकिन कई गंभीर मेडिकल इमरजेंसी में सही समय पर इलाज न मिलने के कारण इंसान अपनी जान गंवा बैठता है। मेडिकल न्यूट्रिशनिस्ट और विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर में दिखने वाले इन गंभीर शारीरिक बदलावों को कभी भी सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

शरीर में दिखने वाले ये 6 गंभीर और अंतिम लक्षण:

1. आवाज में गंभीर बदलाव (घरघराहट):

विशेषज्ञों के मुताबिक, जीवन के अंतिम कुछ घंटों में इंसान की आवाज पूरी तरह बदलने लगती है। यह सामान्य गले की खराश जैसा नहीं होता, बल्कि व्यक्ति के गले और फेफड़ों में तरल पदार्थ (Fluid) जमा होने के कारण सांस लेते समय एक अजीब सी घरघराहट या भारी आवाज निकलने लगती है।

2. सांस लेने के तरीके में बड़ा बदलाव:

अंतिम समय में इंसान के सांस लेने का पैटर्न पूरी तरह बिगड़ जाता है। कई बार व्यक्ति बहुत तेजी से सांस लेता है, तो कई बार दो सांसों के बीच बहुत लंबा अंतराल (Gap) देखा जा सकता है। कुछ मरीजों में सांस लेते और छोड़ते समय तेज आवाज भी आती है।

3. मानसिक स्थिति और भ्रम (Confusion):

शरीर में ऑक्सीजन की कमी और अंगों के धीरे-धीरे काम बंद करने के कारण दिमाग पर गहरा असर पड़ता है। ऐसे समय में मरीज को अत्यधिक भ्रम, बेचैनी, याददाश्त में अचानक कमी आना या अपने आसपास के माहौल और अपनों को पहचानने में भारी परेशानी होने लगती है।

4. हाथ-पैरों का अचानक ठंडा पड़ना:

जब शरीर के मुख्य अंग (जैसे दिल और फेफड़े) काम करना बंद करने की स्थिति में आते हैं, तो शरीर का पूरा ब्लड सर्कुलेशन केवल उन्हीं जरूरी अंगों को बचाने में लग जाता है। नतीजा यह होता है कि इंसान के हाथ और पैर पूरी तरह ठंडे पड़ जाते हैं और कभी-कभी त्वचा का रंग बदलकर उस पर नीले या बैंगनी रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं।

5. अचानक मेडिकल इमरजेंसी:

कई बार इंसान को बिना किसी पुराने लक्षण के अचानक गंभीर हार्ट अटैक (Heart Attack) या ब्रेन स्ट्रोक (Brain Stroke) आ जाता है। ऐसी स्थिति में शुरुआती एक घंटा यानी ‘गोल्डन ऑवर’ सबसे ज्यादा गंभीर होता है। इसमें जरा सी भी देरी जानलेवा साबित हो सकती है।

6. शरीर से जरूरत से ज्यादा खून बहना:

किसी दुर्घटना, गहरी चोट या फ्रैक्चर होने के बाद यदि शरीर से अत्यधिक मात्रा में खून बह जाता है, तो शरीर ‘हाइपोवोलेमिक शॉक’ में चला जाता है। कई बार लोग बाहरी चोट को छोटा समझकर लापरवाही कर देते हैं, जिससे अंदरूनी ब्लीडिंग (Internal Bleeding) के कारण जान चली जाती है।

विशेषज्ञों की सलाह: भूलकर भी न करें ‘सेल्फ-मेडिकेशन’

​डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि ऊपर बताए गए लक्षण किसी मेडिकल इमरजेंसी या जीवन के अंतिम पड़ाव के हो सकते हैं। ऐसी किसी भी स्थिति में खुद से कोई दवा (Self-Medication) देने की भूल कभी न करें। स्थिति गंभीर होते ही तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं और केवल प्रमाणित डॉक्टरों की देखरेख में ही मरीज का इलाज करवाएं। सही समय पर लिया गया फैसला किसी की जान बचा सकता है।

Ami News
Author: Ami News

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