स्वच्छ भारत अभियान को ठेंगा: पठानकोट डीसी कॉम्प्लेक्स के वॉशरूम बने ‘नरक’
प्रशासन की नाक के नीचे स्वच्छता ने तोड़ा दम, अधिकारियों के पास ‘VVIP’ शौचालय, जनता और महिलाएं संक्रमण के खतरे में

पठानकोट: एक तरफ जहां सरकार ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं पठानकोट जिला प्रशासनिक परिसर (DC Complex) की जमीनी हकीकत इस दावों को पूरी तरह खोखला साबित कर रही है। प्रशासनिक अधिकारियों की नाक के नीचे और उनकी ही छत के नीचे स्वच्छता दम तोड़ चुकी है। डीसी कॉम्प्लेक्स स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) शाखा और एटीएम के ठीक बगल में बने शौचालय इस समय गंदगी का ऐसा ‘नरक’ बन चुके हैं, जहाँ दो मिनट खड़ा होना भी किसी के लिए भी एक बड़ी चुनौती है।
तस्वीरें बयां कर रही बदहाली, पानी पीने लायक नहीं
परिसर में बने शौचालयों की हालत इतनी खस्ता है कि चारों तरफ सिर्फ गंदगी, टूटी हुई पाइपलाइनें और असहनीय दुर्गंध फैली हुई है। स्थिति यह है कि वॉशरूम के ठीक पास लगे वाटर कूलर से पानी पीना तो दूर, वहाँ से गुजरने वाले लोग भी अपना मुंह दबाकर निकलने को मजबूर हैं। टूटी कुर्सियों और कबाड़ को कचरादान बनाकर खुले में फेंक दिया गया है, जिसपर लगा जंग यह बताने के लिए काफी है कि यहाँ महीनों से कोई सुध लेने नहीं आया।
“कोई एनआरआई आ जाए तो क्या सोचेगा?”
परिसर में काम के सिलसिले में आए स्थानीय निवासी सतपाल शर्मा ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, “यहाँ हर आम इंसान को नाक में दम आ रखा है। इतनी गंदगी है कि अगर बाहर से कोई एनआरआई आ जाए, तो वह सोचेगा कि इंडिया का क्या हाल बना दिया है। बातें तो बड़ी-बड़ी की जाती हैं, लेकिन ग्राउंड वर्क कुछ नहीं है।”

महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान, यूटीआई और संक्रमण का खतरा
इस पूरे मामले में सबसे दयनीय स्थिति महिलाओं की है। कचहरी और डीसी ऑफिस में जिले भर से महिलाएं अपने कागजी व अन्य कामों के लिए हर रोज पहुंचती हैं। लेकिन महिला शौचालय की जो हालत है, वह बेहद शर्मनाक है। आपातकालीन स्थिति (In case of emergency) में महिलाओं को मजबूरी में इन्हीं बेहद गंदे शौचालयों का उपयोग करना पड़ता है, जिससे उन्हें यूटीआई (Urinary Tract Infection) और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है।

सरकारी बाबुओं के लिए अलग व्यवस्था, जनता क्यों बेबस?
हैरानी की बात यह है कि परिसर में बैठने वाले सरकारी अधिकारी और कर्मचारी तो अपने ऑफिसों के अंदर बने साफ-सुथरे वॉशरूम्स का इस्तेमाल कर लेते हैं, लेकिन दूर-दराज के गांवों से आने वाली आम जनता को इस नरक में धकेल दिया गया है।
जब इस पूरी बदहाली को लेकर उपायुक्त (DC) का पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो वह छुट्टी पर होने या कार्यालय में उपलब्ध न होने के कारण नहीं मिल सकीं और उनके दफ्तर पर ताला लटका मिला।








