अपहरण व हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर फूटा गुस्सा, SSP दफ्तर जा रहे परिजनों व किसानों को पुलिस ने रास्ते में रोका

गुरदासपुर (काहनूवान):जमीन विवाद के चलते एक व्यक्ति के कथित अपहरण के बाद हुई हत्या के मामले में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से गुस्साए परिजनों ने बुधवार को जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन करने का प्रयास किया। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत परिजनों और उनके समर्थन में आए किसानों ने एसएसपी (SSP) कार्यालय के बाहर धरना देने के लिए कूच किया था। हालांकि, पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें धरना स्थल पर पहुंचने से पहले ही बब्बेहाली गांव के पास भारी पुलिस बल तैनात कर रास्ते में रोक लिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस हुई और काफी समय तक मौके पर तनाव की स्थिति बनी रही।
क्या है पूरा मामला?
परिजनों के अनुसार, कस्बे में पिछले कुछ समय से एक जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। आरोप है कि इसी रंजिश के चलते उनके परिवार के एक सदस्य का अपहरण कर लिया गया और बाद में उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला तो दर्ज किया, लेकिन घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी किसी भी मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
”जमीन विवाद में हमारे परिवार के सदस्य को अगवा कर मार डाला गया। नामजद आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत होने के बाद भी पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। जब हम न्याय की मांग के लिए शांतिपूर्ण ढंग से प्रशासन के पास जा रहे हैं, तो हमें रास्ते में ही बंधक बना लिया गया।”
— पीड़ित परिवार के सदस्य

बब्बेहाली गांव के पास भारी पुलिस बल तैनात
बुधवार सुबह जैसे ही पीड़ित परिवार और उनके समर्थन में आए किसान यूनियनों के नेता एसएसपी कार्यालय की ओर बढ़े, पुलिस ने बब्बेहाली गांव के पास नाकाबंदी कर दी। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे। इस दौरान पुलिस और किसानों के बीच जमकर नोकझोंक हुई।

प्रशासन पर आवाज दबाने का आरोप
प्रदर्शनकारी किसानों और परिजनों ने रोष जताते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन आरोपियों को पकड़ने में तो नाकाम रहा है, उल्टा न्याय मांग रहे पीड़ित परिवार की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक सभी नामजद आरोपियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता और मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष और तेज होगा।








