मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने पर भड़की कांग्रेस; भाजपा और चुनाव आयोग के खिलाफ आज से तीन दिवसीय प्रदेशव्यापी जनआंदोलन
न्याय नहीं मिलने से कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश, तीनों विंग (युवा, छात्र और महिला कांग्रेस) अलग-अलग दिनों में सड़क पर उतरकर जताएंगे विरोध; पुतला दहन और कार्यालयों के घेराव की तैयारी।
भोपाल: मध्य प्रदेश की सियासत में राज्यसभा चुनाव को लेकर छिड़ा विवाद अब चुनावी चौखट से निकलकर सड़क के संग्राम में तब्दील हो चुका है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त होने के बाद सूबे की राजनीति में उबाल आ गया है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र की हत्या और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर एक बड़ा आघात बताया है। इसके विरोध में पार्टी ने सोमवार (15 जून) से तीन दिवसीय उग्र प्रदेशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। आगामी तीन दिनों तक चलने वाला यह अभियान प्रदेश के सभी जिलों में कांग्रेस की एकजुटता और नाराजगी का गवाह बनेगा।
दिल्ली से भोपाल तक गुहार बेकार, अब जनआंदोलन ही रास्ता
कांग्रेस नेतृत्व का आरोप है कि राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया में सत्ता के दबाव में पूरी तरह पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया गया है, जिसने लोकतांत्रिक मूल्यों को गहरी ठेस पहुंचाई है। दिल्ली से लेकर भोपाल तक न्याय की हर चौखट खटखटाने के बावजूद पार्टी को राहत नहीं मिली है। राष्ट्रपति से मुलाकात का समय न मिलना, निर्वाचन आयोग द्वारा अपील को खारिज किया जाना और अंततः सुप्रीम कोर्ट द्वारा अधिकारिता का हवाला देकर याचिका को अस्वीकार किए जाने के बाद अब कांग्रेस के पास केवल जनता की अदालत (जनआंदोलन) का रास्ता बचा है। इस कानूनी विफलता के बाद से पार्टी कार्यकर्ताओं में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

जीतू पटवारी की रणनीति: तीनों मोर्चे संभालेंगे कमान
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देशानुसार, इस तीन दिवसीय आंदोलन को चरणबद्ध और आक्रामक रूप दिया गया है। आंदोलन की रूपरेखा कुछ इस प्रकार तय की गई है:
- 15 जून (सोमवार): युवा कांग्रेस (Youth Congress) के नेतृत्व में प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों पर निर्वाचन आयोग के खिलाफ जंगी प्रदर्शन किया जाएगा।
- 16 जून (मंगलवार): एनएसयूआई (NSUI) के छात्र कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
- 17 जून (बुधवार): महिला कांग्रेस पूरे प्रदेश में मोर्चा संभालते हुए भाजपा कार्यालयों का घेराव और पुतला दहन जैसे उग्र कार्यक्रम आयोजित करेगी।

नए सियासी संघर्ष की आहट
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव के बहाने शुरू हुआ यह विवाद मध्य प्रदेश में एक बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होना अब केवल एक तकनीकी या चुनावी मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह कांग्रेस के लिए अस्मिता की लड़ाई बन गया है। फिलहाल, पूरे प्रदेश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले तीन दिनों में कांग्रेस का यह आंदोलन क्या रुख अख्तियार करता है और सत्तारूढ़ भाजपा इस आक्रामक रणनीति का मुकाबला किस तरह करती है।









