कंधे के दर्द को न करें नजरअंदाज, हो सकता है ‘फ्रोजन शोल्डर’
मेनोपॉज के दौरान महिलाओं में बढ़ जाता है इसका खतरा, समय पर इलाज और फिजियोथेरेपी से संभव है सुधार

नई दिल्ली आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब लाइफस्टाइल के कारण कंधे का दर्द और जकड़न एक आम समस्या बनती जा रही है। मेडिकल भाषा में इसे ‘फ्रोजन शोल्डर’ (Frozen Shoulder) या ‘एडहेसिव कैप्सुलिटिस’ (Adhesive Capsulitis) कहा जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि यह स्थिति धीरे-धीरे कंधे की गति को पूरी तरह सीमित कर देती है, जिससे प्रभावित व्यक्ति के लिए हाथ उठाना, कपड़े पहनना या रात को करवट लेना भी बेहद दर्दनाक और मुश्किल हो जाता है।
क्यों जाम हो जाता है कंधा?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या तब उत्पन्न होती है जब कंधे को घेरने वाला कैप्सूल (टिश्यू की परत) सख्त और मोटा हो जाता है। इसके कारण जोड़ (Joint) की प्राकृतिक मूवमेंट कम हो जाती है। इसमें दर्द और जकड़न अचानक नहीं, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ती है और यह स्थिति कई महीनों या सालों तक परेशान कर सकती है।
तीन चरणों में बढ़ती है यह बीमारी
डॉक्टरों के मुताबिक, फ्रोजन शोल्डर की समस्या मुख्य रूप से तीन चरणों (Stages) में विकसित होती है। यह पूरी प्रक्रिया कई महीनों से लेकर 1-2 साल तक चल सकती है:
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- 1. फ्रीज़िंग स्टेज (Freezing Stage): इस शुरुआती चरण में कंधे में तेज दर्द शुरू होता है। जैसे-जैसे दर्द बढ़ता है, कंधे को हिलाना-डुलाना मुश्किल होने लगता है।
- 2. फ्रोजन स्टेज (Frozen Stage): इस चरण में दर्द थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन कंधे की जकड़न (Stiffness) बहुत अधिक बढ़ जाती है। कंधा पूरी तरह जाम सा महसूस होता है।
- 3. थॉइंग स्टेज (Thawing Stage): यह रिकवरी का चरण है। इसमें धीरे-धीरे कंधे की मूवमेंट में सुधार होने लगता है और जकड़न कम होती है।
किन लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा?
- यह समस्या सबसे ज्यादा 40 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों में देखी जाती है।
- पुरुषों की तुलना में महिलाएं इसकी शिकार अधिक होती हैं।
- किसी चोट, सर्जरी या बीमारी के कारण जो लोग लंबे समय तक अपने कंधे का इस्तेमाल नहीं कर पाते, उनमें इसका जोखिम काफी बढ़ जाता है। आंकड़ों के अनुसार, हर साल लाखों लोग इस बीमारी से प्रभावित होते हैं।

मेनोपॉज और एस्ट्रोजन का संबंध
हालिया रिसर्च में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि महिलाओं में मेनोपॉज (Menopause) के दौरान फ्रोजन शोल्डर का खतरा बढ़ जाता है। दरअसल, मेनोपॉज के वक्त शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में भारी गिरावट आती है। यह हार्मोन शरीर में सूजन को रोकने और टिश्यू को लचीला बनाए रखने में मदद करता है। इसकी कमी से कंधे का कैप्सूल सख्त होने लगता है।

इलाज और बचाव: लापरवाही से बचें
विशेषज्ञों का कहना है कि फ्रोजन शोल्डर से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि सही समय पर इलाज शुरू करना जरूरी है।
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- फिजियोथेरेपी: इस समस्या का सबसे प्रभावी समाधान फिजियोथेरेपी और हल्के स्ट्रेचिंग व्यायाम हैं, जो कंधे के लचीलेपन को वापस लाते हैं।
- शॉकवेव थेरेपी: आधुनिक चिकित्सा में शॉकवेव थेरेपी की मदद से भी जकड़न और दर्द में तेजी से सुधार किया जा रहा है।
- सलाह: शुरुआती लक्षणों (हल्के दर्द या जकड़न) को नजरअंदाज न करें। समय पर डॉक्टर से संपर्क करने से बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है।








