पंजाब में चरमरा सकती हैं ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं, CHOs ने खोला मोर्चा
15 जून से ऑनलाइन-ऑफलाइन सेवाएं ठप्प करने की चेतावनी; 2 जुलाई को मुख्यमंत्री आवास का होगा घेराव

पंजाब के ग्रामीण इलाकों में स्थित आयुष्मान आरोग्य केंद्रों में मिल रही मुफ्त सेहत सेवाएं आने वाले दिनों में लंबे समय के लिए पूरी तरह ठप्प हो सकती हैं। लंबे समय से लटक रही मांगों और काम के लगातार बढ़ रहे बोझ को लेकर राज्य के सभी कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) पिछले दो सालों से भारी रोष में हैं। अब जत्थेबंदी के नेताओं ने सेहत विभाग के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल बजाते हुए एक बड़े आंदोलन का ऐलान कर दिया है।
जिला स्तर के नेताओं ने कड़े शब्दों में कहा कि हर तरह की प्राकृतिक आपदाओं और महामारी के दौरान भी पूरी ईमानदारी और तनदेही से ड्यूटी निभाने वाले CHOs की जायज मांगों को सेहत विभाग पूरी तरह से नजरअंदाज कर रहा है। विभाग द्वारा मसलों को हल करने के बजाय उलटा कर्मचारियों पर काम का बोझ और बढ़ाया जा रहा है। नेताओं का आरोप है कि नया ‘इंसेंटिव परफॉर्मा’ लागू करके कर्मचारियों का मानसिक शोषण किया जा रहा है।

चरणबद्ध आंदोलन का पूरा शेड्यूल:
स्टेट कमेटी के फैसले के अनुसार, अगर विभाग ने तुरंत मीटिंग करके मांगों का समाधान नहीं निकाला, तो कड़ा संघर्ष शुरू किया जाएगा:
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- 15 जून से: पुराना इंसेंटिव परफॉर्मा बहाल न होने पर गांवों के सेहत केंद्रों की सभी ऑनलाइन और ऑफलाइन सेवाएं पूरी तरह बंद कर ब्लॉक स्तर पर रोष प्रदर्शन शुरू होंगे।
- 22 जून को: पंजाब के हर जिले में सिविल सर्जन ऑफिस के आगे बड़े स्तर पर धरने दिए जाएंगे।
- 1 जुलाई तक: यदि फिर भी कोई हल नहीं निकला, तो ब्लॉक लेवल पर हड़ताल और सेवाओं का बायकॉट लगातार जारी रहेगा।
- 2 जुलाई को: राज्य भर के सभी CHO संगरूर जिले में पंजाब के मुख्यमंत्री (CM) के आवास का घेराव करेंगे।
सरकार और विभाग होंगे जिम्मेदार: > यूनियन के नेताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि इस हड़ताल के दौरान ग्रामीण इलाकों में मरीजों को होने वाली किसी भी तरह की परेशानी और हेल्थ सर्विस में रुकावट के लिए हेल्थ डिपार्टमेंट और पंजाब सरकार सीधे तौर पर जिम्मेदार होगी।

इस मौके पर मेजर सिंह, गुरप्यार सिंह, हरप्रीत सिंह, बलकरन सिंह और वीरपाल कौर समेत बड़ी संख्या में संगठन के नेता और कर्मचारी मौजूद थे।
ये हैं कम्युनिटी हेल्थ अफसरों (CHOs) की मुख्य मांगें:
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- सैलरी में विसंगति दूर हो: दूसरे राज्यों के मुकाबले पंजाब के CHO को मिल रही 5000 रुपए कम सैलरी के फर्क को दूर कर वेतन बढ़ाया जाए।
- आबादी के नियम से तय हो टारगेट: CHO का महीने और साल का काम का टारगेट 5000 की आबादी के नियम के हिसाब से ही तय किया जाए।
- बोनस और मर्जर: तीन साल और पांच साल का ‘लॉयल्टी बोनस’ दिया जाए और कर्मचारियों के इंसेंटिव को सीधे सैलरी में मर्ज किया जाए।
- पक्का करे सरकार: ‘बराबर काम बराबर वेतन’ का नियम लागू करके कैडर सैंक्शन किया जाए और सभी कर्मचारियों को रेगुलर (स्थायी) किया जाए।








