हिमाचल और उत्तराखंड सहित पूर्वोत्तर राज्यों में बढ़ सकता है बादल फटने का खतरा: मुख्यमंत्री सुक्खू

- चेतावनी: निचले इलाकों में भी होने लगी हैं बादल फटने की घटनाएं, वैज्ञानिक अध्ययन शुरू।
- संकट: पिछले 3 वर्षों में हिमाचल ने झेलीं दो बड़ी आपदाएं, जान-माल का हुआ भारी नुकसान।
- बदलाव: शिमला में जंगलों की जगह खड़ी हो रहीं इमारतें, वर्टिकल (ऊर्ध्वाधर) निर्माण की जरूरत।
- विकास: शिमला की सुंदरता और सुविधाओं के लिए ₹1600 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट्स पर काम जारी।
शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में सतत शहरीकरण (Sustainable Urbanization) और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में न केवल हिमाचल, बल्कि उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के राज्यों में भी बादल फटने की घटनाएं तेजी से बढ़ सकती हैं।
मुख्यमंत्री शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में नगर निगम के पूर्व उप महापौर टिकेंद्र पंवार द्वारा संपादित पुस्तक ‘सिटी लिमिट्स – द क्राइसिस ऑफ अर्बनाइजेशन’ का विमोचन करने के बाद एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे।
बादल फटने की घटनाओं का हो रहा वैज्ञानिक अध्ययन
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने पिछले तीन वर्षों के दौरान दो बड़ी प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है, जिससे राज्य को जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा, “अब बादल फटने की घटनाएं केवल ऊंचे पहाड़ी इलाकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि निचले इलाकों में भी देखी जा रही हैं। सरकार अब इसका वैज्ञानिक अध्ययन करवा रही है।” श्री सुक्खू ने केंद्रीय गृह मंत्री के साथ हुई एक बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने केंद्र को भी अवगत कराया है कि भविष्य में यह संकट केवल हिमाचल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के राज्य भी इसकी जद में आ सकते हैं।
“मैंने अपने बचपन से शिमला को बदलते देखा है। जिन इलाकों में कभी घने जंगल हुआ करते थे, आज वहां कंक्रीट की इमारतें खड़ी हैं। अब हमें पर्यावरण बचाने के लिए वर्टिकल (ऊर्ध्वाधर) निर्माण की ओर बढ़ना होगा।” > — सुखविंदर सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री (हि.प्र.)

शिमला के कायाकल्प के लिए ₹1645 करोड़ की योजनाएं
मुख्यमंत्री ने शिमला को आधुनिक और सुंदर बनाने के लिए बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का ब्योरा साझा किया:
- भूमिगत डक्ट प्रणाली: शहर से ओवरहेड (लटकते हुए) तारों को हटाने और सुंदरता बढ़ाने के लिए ₹145 करोड़ की लागत से अंडरग्राउंड डक्ट बनाए जा रहे हैं।
- आधुनिक परिसर: मौजूदा सब्जी मंडी स्थल पर ₹600 करोड़ की लागत से एक भव्य और आधुनिक कॉम्प्लेक्स विकसित किया जा रहा है।
- 24 घंटे पानी: शिमला शहर के निवासियों को चौबीसों घंटे पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ₹800 करोड़ की जल आपूर्ति योजना लागू की जा रही है।
- अन्य प्रयास: लिफ्ट क्षेत्र के पास एक अंडरपास का प्रस्ताव है, सर्कुलर रोड को चौड़ा करने के लिए भूमि अधिग्रहण जारी है और शहर के ‘ग्रीन जोन’ (अधिसूचित हरित क्षेत्रों) को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

भविष्य की रणनीति: नई टाउनशिप और एयरो सिटी
राज्य के दीर्घकालिक शहरी विकास पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की रणनीतियों के तहत ‘हिम-चंडीगढ़’ और ‘हिम-पंचकूला’ जैसी आधुनिक टाउनशिप विकसित करने की योजना है। इसके साथ ही कांगड़ा में एक ‘एयरो सिटी’ बनाने पर भी काम चल रहा है, जिससे पर्यटन के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
इस अवसर पर झारखंड उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि अनियंत्रित शहरीकरण को रोकने और व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए शहरी शासन (Urban Governance) में संस्थागत जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है।








