ट्रिब्यूनल का बड़ा फैसला: सड़क हादसे में जान गंवाने वाले छात्र के माता-पिता को मिलेगा 14.44 लाख का मुआवजा
अदालत ने बीमा कंपनी की ‘नशे और बिना हेलमेट’ की दलीलें खारिज कीं; 6% ब्याज भी देना होगा

सुंदरनगर (मंडी): हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में मोटर एक्सीडैंट क्लेम ट्रिब्यूनल सुंदरनगर ने एक बेहद अहम और कड़ा फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को तगड़ा झटका दिया है। अदालत ने एक सड़क दुर्घटना में अपनी जान गंवाने वाले 18 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्र के माता-पिता के हक में फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी को आदेश दिया है कि वह पीड़ित परिवार को 14,44,800 रुपए का मुआवजा अदा करे। इसके साथ ही, अदालत ने जिम्मेदारी से बचने के लिए बीमा कंपनी द्वारा दी गई ‘नशे में गाड़ी चलाने’ और ‘बिना हेलमेट’ जैसी दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया।
साल 2019 में धनोटू के पास हुआ था दर्दनाक हादसा
यह दर्दनाक हादसा 21 अक्तूबर, 2019 की रात करीब 12 बजे सुंदरनगर के धनोटू के पास पेश आया था। मृतक 18 वर्षीय अविनाश, कनैड़ स्थित ‘सिरडा ग्रुप ऑफ इंस्टीच्यूशंस’ में सिविल इंजीनियरिंग डिप्लोमा के तीसरे सैमेस्टर का छात्र था। उस रात अविनाश अपने दोस्त मयंक के साथ मोटरसाइकिल पर जा रहा था, तभी धनोटू के पास उनकी बाइक अचानक अनियंत्रित होकर फिसल गई। इस हादसे में अविनाश के सिर और तिल्ली (Spleen) पर बेहद गंभीर चोटें आईं, जिसके कारण उसकी मौत हो गई थी।

बीमा कंपनी की बहानेबाजी कोर्ट में नहीं आई काम
हादसे के बाद जब अविनाश के बेबस माता-पिता ने संबंधित बीमा कंपनी से संपर्क किया, तो कंपनी ने बीमा राशि देने में आनाकानी शुरू कर दी। इसके बाद मजबूरन पीड़ित परिवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी के वकीलों ने मुआवजा देने से बचने की पूरी कोशिश की। कंपनी ने दलील दी कि:
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- हादसे के वक्त मोटरसाइकिल चालक नशे की हालत में था।
- चालक बिना हेलमेट के था।
- बाइक पर ट्रिपल राइडिंग (तीन लोग) की जा रही थी।
कोर्ट की टिप्पणी: > मोटर एक्सीडैंट क्लेम ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी की अदालत ने इन तमाम दलीलों को अपर्याप्त और सबूतों के अभाव में कमजोर मानते हुए ठुकरा दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि दावे से मुकरने के लिए ये बहाने काफी नहीं हैं और मुआवजे के भुगतान की मुख्य जिम्मेदारी बीमा कंपनी की ही बनती है।

6 प्रतिशत वार्षिक दर से देना होगा ब्याज
अपने जवान बेटे को खोने के गम में डूबे माता-पिता ने ट्रिब्यूनल में 1 करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। अदालत ने मामले के सभी कानूनी और मानवीय पहलुओं की गहन जांच के बाद 14,44,800 रुपए की राशि तय की।
अहम आदेश: कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी साफ किया है कि बीमा कंपनी को सिर्फ मुआवजा राशि ही नहीं देनी होगी, बल्कि याचिका दायर करने की तिथि से लेकर जब तक पूरा भुगतान नहीं हो जाता, तब तक इस राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज भी चुकाना होगा। अदालत के इस फैसले से पीड़ित परिवार को एक बड़ा कानूनी संबल मिला है।








