जालंधर से बड़ी खबर: मोहाली सनटेक सिटी का बिल्डर अजय सहगल ED द्वारा गिरफ्तार, करोड़ों के CLU घोटाले का आरोप

जालंधर/मोहाली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जालंधर यूनिट ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मोहाली के चर्चित ‘सनटेक सिटी’ प्रोजेक्ट के प्रमोटर और इंडियन को-ऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी के सचिव अजय सहगल को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी करोड़ों रुपये के ‘चेंज ऑफ लैंड यूज’ (CLU) घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) मामले में की गई है। आरोपी बिल्डर पर जमीन मालिकों और खरीदारों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने का आरोप है।
पूछताछ के बाद जालंधर दफ्तर में हुई गिरफ्तारी
सूत्रों के मुताबिक, ED द्वारा अजय सहगल को पिछले दिनों पूछताछ के लिए जालंधर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में समन किया गया था। शुक्रवार देर रात लंबी पूछताछ और बयानों की विसंगतियों के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी ने उन्हें हिरासत में ले लिया। शनिवार को मोहाली की विशेष पीएमएलए (PMLA) अदालत ने आरोपी को 5 दिन की ईडी कस्टडी में भेज दिया है।
फर्जी दस्तावेजों और अंगूठे के निशान से लिया CLU
ED की जांच में सामने आया है कि अजय सहगल ने 15 बेकसूर जमीन मालिकों (किसानों) की करीब 30.5 एकड़ जमीन के फर्जी सहमति पत्र (Consent Letters) तैयार किए थे। इन कागजातों पर किसानों के जाली हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लगाए गए थे। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के सहारे पंजाब सरकार के विभाग से ‘सनटेक सिटी’ जैसे मेगा प्रोजेक्ट के लिए CLU (भूमि उपयोग परिवर्तन) की मंजूरी हासिल की गई।
200 करोड़ से अधिक की अवैध कमाई का अनुमान: > जांच एजेंसी का दावा है कि इस फर्जीवाड़े के जरिए सनटेक सिटी के अलावा ‘ला कानेला’ रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स और ‘डिस्ट्रिक्ट-7’ कमर्शियल प्रोजेक्ट भी खड़े कर दिए गए। इन अवैध प्रोजेक्ट्स में रेरा (RERA) की मंजूरी और रजिस्ट्रेशन से पहले ही फ्लैट्स और प्लॉट बेचकर ₹200 करोड़ से अधिक की ‘Proceeds of Crime’ (अपराध की कमाई) जुटाई गई।

करोड़ों की नकदी और ऊंची इमारतों से ‘उड़ते नोट’
गौरतलब है कि इसी महीने (7 मई को) ED ने इस घोटाले से जुड़े 12 से अधिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। इस दौरान मोहाली के एक फ्लैट (बिचौलिए नितिन गोयल के परिसर) की 9वीं मंजिल की बालकनी से नोटों से भरे बैग नीचे सड़क पर फेंकने का हाई-प्रोफाइल ड्रामा भी सामने आया था, जिसे ED ने मौके पर ही जब्त कर लिया था। छापेमारी में कुल ₹1 करोड़ के करीब कैश बरामद हुआ था।

रडार पर GMADA के बड़े अधिकारी और नेता
इस घोटाले के तार सिर्फ बिल्डरों तक ही सीमित नहीं हैं। पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज शुरुआती FIR के बाद जब ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच संभाली, तो पाया कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग और GMADA (ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी) के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने मोटी रिश्वत (किकबैक) लेकर इस फर्जीवाड़े को संरक्षण दिया। ईडी अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ सरकारी अफसरों और सफेदपोशों की भी गिरफ्तारियां संभव हैं।








