AMI News: जानलेवा लू के बीच जनगणना कर रहे शिक्षक को पड़ा लकवा, तड़पते रहे सड़क पर; नहीं मिली एंबुलेंस
अधिकारियों की संवेदनहीनता पर फूटा शिक्षक यूनियनों का गुस्सा; गंभीर हालत में फरीदकोट रेफर, जिंदगी-मौत के बीच जंग जारी

लुधियान: आसमान से बरसती आग और जानलेवा लू के थपेड़ों के बीच फील्ड में उतरकर जनगणना का काम कर रहे एक सरकारी प्राइमरी स्कूल के शिक्षक के लकवे (पैरालिसिस) की चपेट में आने का एक बेहद खौफनाक मामला सामने आया है। इस हादसे के बाद से सरकारी कर्मचारियों और शिक्षक यूनियनों में प्रशासन की लचर व्यवस्था व संवेदनहीनता को लेकर भारी आक्रोश फैल गया है। अध्यापकों का सीधा आरोप है कि तपती धूप में महिला स्टाफ सहित शिक्षकों को मौत के मुंह में धकेला जा रहा है, जिनकी सुरक्षा के लिए धरातल पर न तो कोई हेल्पलाइन थी और न ही वक्त पर कोई डॉक्टरी मदद मिल सकी।
तपती धूप में मकान गिनते समय अचानक गिरे बेसुध
प्राप्त विवरण के मुताबिक, इंद्रापुरी स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल में तैनात शिक्षक राम सिंह (मूल निवासी मोगा, वर्तमान तैनाती लुधियाना) सुबह करीब साढ़े आठ बजे भामियां कलां इलाके में तपती धूप के बीच मकानों की गिनती का काम संभाल रहे थे। इसी दौरान अचानक उनके सिर में भयंकर दर्द हुआ और वे बेसुध होकर सड़क के किनारे गिर पड़े।
सहकर्मी शिक्षक पासी सिंह ने बताया कि शुरुआत में वहां से गुजर रहे राहगीरों को लगा कि वे सामान्य तौर पर बेहोश पड़े हैं। लेकिन तभी वहां से गुजर रहे एक स्थानीय बच्चे की नजर उन पर पड़ी और उसने पहचान कर पास में ही रहने वाले एक अन्य अध्यापक को इसकी सूचना दी।
प्रशासन नहीं दे सका एंबुलेंस, सहकर्मियों ने निजी वाहनों से पहुंचाया अस्पताल
घटना के तुरंत बाद जनगणना के सुपरवाइजर और उच्चाधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई, मगर प्रशासन की ओर से मौके पर कोई भी फौरी इमदाद या सरकारी एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी। पीड़ित के परिवार वालों ने गंभीर आरोप लगाए कि राम सिंह ने खुद तबीयत बिगड़ने पर जनगणना प्रभारी से गुहार लगाई थी, परंतु प्रशासन उन्हें एक गाड़ी तक मुहैया कराने में नाकाम रहा।
इसके बाद स्कूल प्रबंधन से खबर मिलते ही सहकर्मी शिक्षक पासी सिंह खुद मौके पर पहुंचे और राम सिंह की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें आनन-फानन में अपनी निजी गाड़ियों से अस्पताल लेकर भागे।

60 हजार का इंजेक्शन, फिर फरीदकोट रेफर; बंद हो चुकी है जुबान
परिजन पहले उन्हें एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने तत्काल 60,000 रुपये का एक विशेष इंजेक्शन लगाने की बात कही। लेकिन स्थिति लगातार बिगड़ती देख उन्हें फरीदकोट के अस्पताल रेफर कर दिया गया। फिलहाल पीड़ित शिक्षक की जुबान बंद हो चुकी है और वे अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।
डीटीएफ ने प्रशासनिक तालमेल पर उठाए गंभीर सवाल
महिला स्टाफ सहित शिक्षकों को गृह जिलों से दूर धकेला: इस पूरे घटनाक्रम पर गहरा रोष जताते हुए डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (DTF) के महासचिव रूपिंदर सिंह गिल ने प्रशासनिक अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि चिलचिलाती धूप और लू के बीच महिला स्टाफ सहित तमाम शिक्षकों को उनके गृह जिलों से सैकड़ों किलोमीटर दूर भेजकर जबरन ड्यूटियां ली जा रही हैं। फील्ड में काम कर रहे कर्मियों के लिए न तो कोई सहायता केंद्र है, न इमरजेंसी मेडिकल किट और न ही अधिकारियों के बीच कोई आपसी तालमेल, जिसके कारण आज एक शिक्षक जिंदगी भर के लिए अपाहिज होने की कगार पर पहुंच गया है।

हादसे के बाद जागी कुंभकर्णी नींद, एडीसी ने दिए कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश
इस पूरे बखेड़े और चौतरफा घिरने के बाद आखिरकार जिला प्रशासन की कुंभकर्णी नींद टूटी है। अतिरिक्त जिला जनगणना अधिकारी-सह-एडीसी (जनरल) पूनम सिंह ने बुधवार को इस गंभीर मामले का कड़ा संज्ञान लेते हुए जनगणना कार्य में जुटे कर्मचारियों की सहूलियत के लिए तत्काल प्रभाव से एक विशेष कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश जारी किए हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि यह कंट्रोल रूम अब जमीनी स्तर पर तैनात कर्मचारियों को हरसंभव मार्गदर्शन, तुरंत सहायता और इमरजेंसी मेडिकल सपोर्ट देगा। इसके साथ ही जिले के सभी एसडीएम को अपने-अपने इलाकों में इस पूरी व्यवस्था की कड़ी निगरानी रखने और खुद फील्ड में नजर बनाए रखने की सख्त हिदायत दी गई है।








