खाकी पर दाग: मृत व्यक्ति ने दी गवाही, हाई-प्रोफाइल NRI महिला हत्याकांड में तत्कालीन SHO और मुंशी पर FIR

लुधियाना: शहर के सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल एनआरआई (NRI) महिला रुपिंदर कौर हत्याकांड में एक ऐसा हैरतअंगेज मोड़ आया है, जिसने पूरे पुलिस महकमे की नींद उड़ा दी है। इसे खाकी पर दाग कहें या फिर जांच के नाम पर हुआ बड़ा खेल, क्योंकि अब कातिलों को पकड़ने वाली पुलिस खुद कटघरे में खड़ी हो गई है। इंसाफ के नाम पर कागजों का ऐसा ‘भूतिया खेल’ खेला गया, जिसने कानून व्यवस्था की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस सनसनीखेज मामले में डेहलों थाने के तत्कालीन एसएचओ (SHO) इंस्पेक्टर सुखजिंदर सिंह और थाना मुंशी हेड कांस्टेबल संजीव कुमार के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है। इन दोनों पर आरोप है कि इन्होंने केस को सुलझाने के चक्कर में कई महीने पहले मर चुके एक व्यक्ति की गवाही कागजों पर दर्ज करवा दी और उसके फर्जी साइन भी खुद ही कर दिए। आरोपियों पर सबूतों से सरेआम खिलवाड़ करने, सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर करने और जाली दस्तावेज तैयार करने का आरोप है।
72 वर्षीय NRI महिला की बेरहमी से हुई थी हत्या
यह पूरा मामला 72 वर्षीय एनआरआई महिला रुपिंदर कौर की बेरहमी से की गई हत्या से जुड़ा है, जो अमेरिका से पंजाब आई थीं। अगस्त 2025 में जब उनके लापता होने की बात सामने आई, तो पुलिस ने जांच शुरू की थी। तब पुलिस ने दावा किया था कि महिला की हत्या सुखजीत सिंह नाम के शख्स ने अपने ही घर के स्टोर रूम में कर दी थी। पुलिस की कहानी के मुताबिक, हत्या के बाद लाश को कमरे में ही जलाया गया, सबूत मिटाने के लिए फर्श तोड़ा गया और सीसीटीवी कैमरे तक बदल दिए गए।

ऐसे हुआ ‘मुर्दे की गवाही’ का भंडाफोड़
इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी सुखजीत को गिरफ्तार किया था और फिर यूके (UK) के रहने वाले एनआरआई चरणजीत सिंह, उसके भाई मनवीर सिंह उर्फ मनी पहलवान और एक अन्य आरोपी दानिश को भी केस में नामजद कर लिया था। पुलिस ने जली हुई हड्डियां, आईफोन के अवशेष और वारदात में इस्तेमाल मोटरसाइकिल बरामद करने का दावा भी ठोक दिया था।
हाईकोर्ट पहुंचे आरोपी ने खोला पुलिस का राज
कानून के हाथ जितने लंबे होते हैं, झूठ के पैर उतने ही छोटे होते हैं। इस पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब आरोपी मनवीर सिंह ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अग्रिम जमानत याचिका में उसने जो दावा किया, उसने अदालत से लेकर पुलिस मुख्यालय तक सबको हिलाकर रख दिया। याचिका में साफ कहा गया कि पुलिस ने केस फाइल में जिस गुरप्रीत सिंह नामक गवाह का बयान 19 सितंबर 2025 को दर्ज दिखाया है, उसकी मौत तो वारदात से महीनों पहले यानी 29 मई 2025 को ही हो चुकी थी। अब सवाल यह खड़ा हो गया कि जो इंसान इस दुनिया में ही नहीं था, उसने थाने आकर गवाही कैसे दे दी?

SIT जांच में खुली परतें, लुधियाना पुलिस में हड़कंप
इस खौफनाक खुलासे के बाद जब पंजाब पुलिस के आला अधिकारियों ने आनन-फानन में एसआईटी (SIT) का गठन किया, तो परदे के पीछे का सच सामने आने लगा। जांच में पता चला कि केस फाइल में दर्ज विवादित बयानों पर तत्कालीन एसएचओ सुखजिंदर सिंह के असली दस्तखत ही नहीं थे।
जब पूर्व एसएचओ से इस बारे में जवाब मांगा गया, तो उन्होंने लिखित में पल्ला झाड़ते हुए कह दिया कि उनके ट्रांसफर के बाद केस फाइल थाना रीडर संजीव कुमार के पास थी और ये हस्ताक्षर फर्जी हैं। एसआईटी को जांच में एक और ऐसा ही संदिग्ध बयान मिला, जिसने इस बात पर पक्की मोहर लगा दी कि केस में ऊपरी स्तर पर भारी जालसाजी हुई है।

अपनों पर ही ठुका मुकदमा
अब वरिष्ठ अधिकारियों के सख्त आदेश पर डेहलों थाना पुलिस ने अपने ही महकमे के इंस्पेक्टर सुखजिंदर सिंह और हेड कांस्टेबल संजीव कुमार के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत फर्जी साक्ष्य और जाली रिकॉर्ड तैयार करने का नया मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस कार्रवाई से लुधियाना पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और अब यह जांच का विषय है कि इस बड़ी साजिश में और कौन-कौन शामिल था।








