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इंसानों को ‘जॉम्बी’ बना रहा है जानवरों वाला नशा: चंडीगढ़ के सेक्टर-33 में दिखे खौफनाक मंजर

सावधान! ‘सिटी ब्यूटीफुल’ में जॉम्बी ड्रग की दस्तक: घंटों सुध-बुध खोकर एक ही जगह खड़े रह रहे लोग

चंडीगढ़ : शहर में पिछले कुछ दिनों से अजीबोगरीब मामले सामने आ रहे हैं, जिसने आम जनता और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। मार्च के आखिरी सप्ताह में सेक्टर-33 B से एक हैरान करने वाली सी.सी.टी.वी. फुटेज सामने आई है, जिसमें एक डिलीवरी बॉय नशे की हालत में करीब दो घंटे तक एक ही मुद्रा में खड़ा रहा। इसी तरह के अब तक कुल 5 मामले सामने आ चुके हैं, जिसे लोग ‘जॉम्बी ड्रग’ का असर कह रहे हैं।

डॉक्टरों का खुलासा: क्या है यह ‘जॉम्बी ड्रग’?

​पी.जी.आई. (PGI) के मनोविज्ञान विभाग के डॉ. क्षितिज और डॉ. राहुल ने इस बढ़ते खतरे पर गहरा विश्लेषण साझा किया है। डॉ. क्षितिज के अनुसार:

​”यह असल में जाइलाज़ीन (Xylazine) और फेंटानिल (Fentanyl) ड्रग्स का एक जानलेवा कॉम्बिनेशन है। इसे लेने के बाद व्यक्ति का स्वभाव अचानक बेहोशी जैसा हो जाता है, और उसका शरीर सुन्न पड़ जाता है, जिससे वह घंटों एक ही पोजीशन में खड़ा या बैठा रहता है। देखने वालों को यह स्थिति ‘जॉम्बी’ जैसी डरावनी लगती है।”

जाइलाज़ीन: जानवरों को सुलाने वाली दवा का इंसानों पर प्रयोग

​विशेषज्ञों ने बताया कि जाइलाज़ीन मूल रूप से एक वेटरनरी ड्रग है, जिसका इस्तेमाल खूंखार जानवरों को शांत करने या उन्हें सर्जरी के दौरान सुलाने के लिए किया जाता है।

  • ​जब बाजार में पारंपरिक नशीले पदार्थों की कमी होती है, तो तस्कर इस सस्ते और खतरनाक विकल्प को सप्लाई करने लगते हैं।
  • ​चूंकि लोगों को इसके गंभीर परिणामों की जानकारी नहीं होती, वे अनजाने में मौत को बुलावा दे रहे हैं।

फेंटानिल: हेरोइन से भी 50 गुना ज्यादा खतरनाक

​फेंटानिल वैसे तो एक मेडिकल पेनकिलर है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल तबाही मचा रहा है। डॉ. राहुल ने चेतावनी दी कि फेंटानिल हेरोइन से भी कई गुना ज्यादा तेज और खतरनाक है।

  • ​अमेरिका में इस ड्रग ने भारी तबाही मचाई है और अब यह भारत के युवाओं तक भी पहुँच रहा है।
  • ​सोशल मीडिया और इंटरनेट के माध्यम से इसके बढ़ते फैलाव ने प्रशासन की चुनौती बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों की सलाह और प्रशासन से मांग

​डॉक्टरों का मानना है कि ‘सिटी ब्यूटीफुल’ चंडीगढ़ में इस जहर को फैलने से पहले ही रोकना होगा।

    1. सख्त जांच-पड़ताल: पुलिस और नारकोटिक्स विभाग को उन रास्तों की पहचान करनी चाहिए जहाँ से यह ड्रग शहर में प्रवेश कर रहा है।
    2. सख्त कार्रवाई: चोरी-छिपे या मेडिकल स्टोर के माध्यम से इसे नाजायज बेचने वालों के खिलाफ तत्काल कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
    3. जन जागरूकता: युवाओं और अभिभावकों को इस नए खतरे के लक्षणों के बारे में जागरूक करना आवश्यक है।

पहचानें लक्षण: यदि कोई व्यक्ति सड़क पर घंटों तक बिना किसी हलचल के एक ही पोजीशन में खड़ा रहे, उसकी आँखें खुली हों पर वह होश में न हो, तो यह ‘जॉम्बी ड्रग’ का संकेत हो सकता है। तुरंत पुलिस या एम्बुलेंस को सूचित करें।

सतर्क रहें, सुरक्षित रहें। नशा सिर्फ एक जीवन नहीं, पूरा परिवार उजाड़ देता है।

Ami News
Author: Ami News

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