पंजाब में ‘सफाई ठप’: अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर सफाई कर्मचारी

चंडीगढ़/जालंधर: पंजाब में नगर निगमों, म्युनिसिपल काउंसिलों और नगर पंचायतों के सफाई कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। ‘म्युनिसिपल एम्प्लॉइज एक्शन कमेटी पंजाब’ और ‘सफाई सेवक यूनियन पंजाब’ के आह्वान पर प्रदेश के 140 से अधिक स्टेशनों पर कामकाज पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
प्रमुख मांगें: पक्की नौकरी और सम्मानजनक वेतन
यूनियन के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार उनकी निम्नलिखित मांगों को स्वीकार नहीं कर लेती:
- कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना: राज्य के लगभग 90% सफाई कर्मचारी वर्तमान में अनुबंध (Contract) पर हैं।
- वेतन वृद्धि: न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 40,000 रुपये प्रति माह किया जाए।
- पुरानी पेंशन स्कीम (OPS): कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए OPS लागू की जाए।
‘झाड़ू’ के दम पर सत्ता, अब वादों से किनारा: यूनियन
सफाई सेवक यूनियन के स्टेट प्रेसिडेंट अशोक सरवन और ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी कुलदीप कागरा ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:
”हड़ताल करना हमारा शौक नहीं, मजबूरी है। साढ़े 4 साल पहले मौजूदा सरकार ने सफाई कर्मचारियों के ‘झाड़ू’ निशान पर वोट मांगकर सत्ता हासिल की थी। उस समय मुख्यमंत्री ने वादा किया था कि किसी को धरने पर बैठने की जरूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन आज 10 हजार रुपये की मामूली सैलरी में परिवार पालना नामुमकिन हो गया है।”

नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ कसमें खा रही है और मुलाकातों के लिए समय देकर मुकर रही है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो सरकार को आगामी चुनावों में भारी राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
जनता की बढ़ेंगी मुश्किलें, सड़कों पर लगेंगे कूड़े के ढेर
सफाई कर्मचारियों के इस पूर्ण बायकॉट का सीधा असर पंजाब की जनता पर पड़ना शुरू हो गया है।
- गंदगी का संकट: घरों और गलियों से कूड़ा न उठने के कारण शहरों में गंदगी फैलने और बीमारियां पनपने का डर पैदा हो गया है।
- ठप पड़ा कामकाज: 140 से ज्यादा स्टेशनों पर काम बंद होने से नगर निकायों की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

‘आर-पार की लड़ाई’ यूनियन ने साफ कर दिया है कि वे अब पीछे हटने वाले नहीं हैं। पंजाब के साथ-साथ अब देश भर में इस संघर्ष को फैलाने की तैयारी की जा रही है। अगर सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो पंजाब के शहरों की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
संपादकीय टिप्पणी (Brief Summary)
पंजाब सरकार के लिए यह हड़ताल एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। एक तरफ आम जनता स्वच्छता और स्वास्थ्य को लेकर परेशान है, तो दूसरी तरफ अपने हक की लड़ाई लड़ रहे सफाई कर्मचारी ‘करो या मरो’ की स्थिति में हैं। अब सबकी नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।








