विहिप की मांग: हिमाचल के मंदिरों से हटे सरकारी नियंत्रण, हिंदू समाज को सौंपी जाए कमान

शिमला : विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने हिमाचल प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए राज्य के प्रमुख मंदिरों का प्रबंधन हिंदू समुदाय को सौंपने की जोरदार मांग की है। गुरुवार को शिमला में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए विहिप के केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने सरकार पर धार्मिक असमानता का आरोप लगाया।
‘धार्मिक असमानता’ पर उठाए सवाल
मिलिंद परांडे ने कहा कि यह विडंबना है कि जहां अन्य धर्मों के पूजा स्थलों का प्रबंधन उनके अपने समुदायों द्वारा किया जाता है, वहीं हिमाचल प्रदेश के 37 प्रमुख मंदिर आज भी सरकारी नियंत्रण में हैं। उन्होंने इसे हिंदू समाज के साथ अन्याय करार देते हुए मांग की कि इन मंदिरों का प्रबंधन तुरंत भक्तों और हिंदू समाज के प्रतिनिधियों को सौंपा जाना चाहिए।

मंदिरों की आय और संपत्ति का ब्योरा
परांडे ने मंदिरों की भारी-भरकम आय का हवाला देते हुए प्रशासनिक खर्चों पर सवाल उठाए। उन्होंने निम्नलिखित आंकड़े प्रस्तुत किए:
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- वार्षिक आय: वर्ष 2024 में इन 37 मंदिरों की कुल आय 200.59 करोड़ रुपये रही।
- सावधि जमा (FD): मंदिरों के पास वर्तमान में 346.26 करोड़ रुपये बैंक एफडी के रूप में जमा हैं।
- अकूत संपत्ति: मंदिरों के खजाने में भारी मात्रा में सोना और चांदी भी सुरक्षित है।
”श्रद्धालु अपनी आस्था के साथ मंदिरों में दान देते हैं ताकि उस राशि का उपयोग सनातन संस्कृति के उत्थान, लंगर और सेवा कार्यों में हो। इस पैसे का इस्तेमाल सरकारी या प्रशासनिक खर्चों के लिए करना अनुचित है।” — मिलिंद परांडे

‘लैंड जिहाद’ और ‘धर्मांतरण’ पर चेतावनी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विहिप नेता ने राज्य में कथित ‘लैंड जिहाद’ पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सरकारी जमीनों पर अवैध अतिक्रमण और निर्माण किए जा रहे हैं, जिन्हें सरकार को तुरंत हटाना चाहिए।
इसके साथ ही, उन्होंने राज्य में बढ़ती ‘लव जिहाद’ और अवैध धर्मांतरण की घटनाओं पर भी कड़ा रुख अपनाया। परांडे ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा:
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- सरकार इन मुद्दों पर तत्काल सख्त कार्रवाई करे।
- यदि ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो विहिप पूरे प्रदेश में व्यापक जनजागरूकता अभियान और आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होगी।








