ब्यास की लहरों को मात: कुल्लू में डूबती महिला के लिए ‘देवदूत’ बने कश्मीर के दो युवा
अखाड़ा बाजार में महिला ने लगाई थी मौत की छलांग, बर्फीले पानी में जान जोखिम में डालकर युवाओं ने बचाया

कुल्लू: जिला मुख्यालय कुल्लू के अखाड़ा बाजार में वीरवार सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक महिला ने उफनती ब्यास नदी में छलांग लगा दी। मौत और जिंदगी के बीच चल रही इस जंग में जम्मू-कश्मीर के दो साहसी युवा मसीहा बनकर आए। युवाओं ने अपनी जान की परवाह किए बिना नदी के बर्फीले और तेज बहाव में उतरकर महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
घटनाक्रम: सुबह 8 बजे मची चीख-पुकार
जानकारी के अनुसार, घटना वीरवार सुबह करीब 8 बजे की है। अखाड़ा बाजार स्थित कार पार्किंग के समीप एक महिला काफी देर से टहल रही थी। अचानक उसने उफनती ब्यास नदी के तेज बहाव में छलांग लगा दी। नदी का पानी न केवल बर्फीला था, बल्कि बहाव इतना तेज था कि देखते ही देखते महिला बहने लगी। किनारे खड़े लोग चिल्लाने लगे, लेकिन तेज लहरों के बीच जाने की हिम्मत किसी की नहीं हो रही थी।

साहस की मिसाल: तैरकर दूसरे तट तक ले गए
उसी समय वहां मौजूद जम्मू-कश्मीर के दो युवाओं की नजर महिला पर पड़ी। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए दोनों ने बिना एक पल गंवाए नदी में छलांग लगा दी। युवाओं ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए न केवल महिला को पानी के ऊपर संभाला, बल्कि उसे बहाव के विपरीत खींचते हुए नदी के दूसरे तट तक सुरक्षित पहुंचा दिया। इस साहसी रेस्क्यू को देख वहां मौजूद लोग दंग रह गए और युवाओं की तत्परता की जमकर सराहना की।
डिप्रेशन की शिकार है महिला
नदी में छलांग लगाने वाली महिला की पहचान रामशिला (कुल्लू) के रूप में हुई है। परिजनों और पुलिस से मिली प्राथमिक जानकारी के अनुसार:
- महिला पिछले काफी समय से मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) से जूझ रही है।
- उसका उपचार चल रहा है और वह दवाइयां ले रही है।
- माना जा रहा है कि मानसिक संतुलन बिगड़ने के कारण ही उसने आत्मघाती कदम उठाया।

अस्पताल में भर्ती, स्थिति स्थिर
रेस्क्यू के तुरंत बाद महिला को प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, अत्यधिक ठंडे पानी के संपर्क में आने के कारण महिला सदमे में थी, लेकिन अब उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
“अगर ये दो युवा समय पर न कूदते, तो ब्यास का तेज बहाव महिला को दूर ले जा सकता था। इन युवाओं ने इंसानियत की मिसाल पेश की है।” > — प्रत्यक्षदर्शी, अखाड़ा बाजार








