राशन वितरण में फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम: अब चेहरा दिखाकर और आंखें स्कैन कर मिलेगा सस्ता अनाज

शिमला/ब्यूरो: प्रदेश के सस्ते राशन के डिपुओं (Fair Price Shops) में अब राशन वितरण की प्रक्रिया पूरी तरह बदलने वाली है। खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग राशन वितरण में पारदर्शिता लाने और फर्जीवाड़े को जड़ से खत्म करने के लिए ‘फेस ऑथैंटिकेशन’ (Face Authentication) और ‘आई स्कैनिंग’ (Eye Scanning) तकनीक लागू करने की तैयारी में है। इस नई व्यवस्था के तहत अब उपभोक्ताओं को न तो अंगूठा लगाने की जरूरत होगी और न ही मोबाइल पर ओटीपी का इंतजार करना होगा।

तीन कंपनियां रेस में, 30 अप्रैल तक पूरी होगी तकनीकी जांच
विभाग ने इस नई प्रणाली के लिए टेंडर आमंत्रित किए थे, जिसमें तीन बड़ी कंपनियों ने अपनी रुचि दिखाई है। वर्तमान में विभाग द्वारा इन कंपनियों की टेक्निकल बिड (Technical Bid) खोली गई है। अधिकारी फिलहाल मशीनों का तकनीकी मूल्यांकन कर रहे हैं कि ये मशीनें जमीनी स्तर पर कितनी सटीक और पारदर्शी होंगी।
- समय सीमा: मूल्यांकन की यह प्रक्रिया 30 अप्रैल तक चलेगी।
- चयन प्रक्रिया: तकनीकी जांच के बाद फाइनल बिड (Financial Bid) खोली जाएगी। जिस कंपनी की मशीनों की कीमत सबसे कम और गुणवत्ता बेहतर होगी, उसे टेंडर जारी किया जाएगा।
5100 अत्याधुनिक POS मशीनों की होगी खरीद
विभाग पूरे प्रदेश के लिए 5100 नई और अत्याधुनिक पॉइंट ऑफ सेल (POS) मशीनें खरीदने जा रहा है। इन मशीनों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें फेस और आई स्कैनिंग के लिए इन-बिल्ट सेंसर होंगे। सरकार की अंतिम मंजूरी मिलते ही इन मशीनों की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

बायोमीट्रिक और ओटीपी के झंझट से मुक्ति
अक्सर देखा गया है कि बुजुर्गों या कड़ी मेहनत करने वाले मजदूरों के फिंगरप्रिंट (बायोमीट्रिक) मशीन पर मैच नहीं होते, जिससे उन्हें राशन लेने में परेशानी होती है। नई तकनीक से यह समस्या खत्म हो जाएगी।
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- ई-केवाईसी (e-KYC): विभाग ने पहले ही राशन कार्ड में शामिल सभी सदस्यों की ई-केवाईसी करवा ली है।
- आधार लिंकिंग: राशन कार्ड पहले से ही आधार से लिंक हैं। जैसे ही उपभोक्ता मशीन के सामने आएगा, उसका चेहरा स्कैन होते ही राशन की पूरी जानकारी स्क्रीन पर आ जाएगी।
- डिजिटल बिल: राशन मिलने के बाद उपभोक्ता को मौके पर ही डिजिटल बिल का प्रिंट भी दिया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहेगी।
“हमारा लक्ष्य राशन वितरण प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। नई मशीनों से न केवल फर्जीवाड़ा रुकेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को बायोमीट्रिक न आने जैसी समस्याओं से भी राहत मिलेगी।” > — खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के आधिकारिक सूत्र








