कलयुगी मां की क्रूरता: 11 दिन के मासूम को जिंदा जलाने की कोशिश, हालत गंभीर

पठानकोट (भोआ): मानवता को शर्मसार करने वाली एक दिल दहला देने वाली घटना पठानकोट के गांव भोआ से सामने आई है। यहाँ एक मां पर अपने ही 11 दिन के नवजात शिशु को आग के हवाले करने का आरोप लगा है। गंभीर रूप से झुलसे बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ वह जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है।
बाजार से लौटा पिता, तो उड़ गए होश
मिली जानकारी के अनुसार, घटना के वक्त बच्चे का पिता किसी काम से बाजार गया हुआ था और घर में आरोपी महिला अकेली थी। जब पिता घर लौटा, तो उसे बच्चे के चीखने-चिल्लाने की आवाजें सुनाई दीं। कमरे में जाकर देखा तो नजारा खौफनाक था—मासूम बच्चा बुरी तरह झुलस चुका था। पिता ने बिना देरी किए बच्चे को नजदीकी अस्पताल पहुँचाया।
चार साल पहले भी हुई थी एक बच्चे की संदिग्ध मौत
पीड़ित पिता ने अपनी पत्नी पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि:
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- संदेहास्पद व्यवहार: पत्नी का व्यवहार लंबे समय से संदिग्ध रहा है।
- गर्भावस्था में हमले: महिला ने गर्भ के दौरान भी कई बार बच्चे को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की थी।
- पुरानी घटना का साया: पिता का दावा है कि चार साल पहले भी उनके एक बच्चे की मौत आग लगने के कारण हुई थी, जिसे अब इस घटना से जोड़कर देखा जा रहा है।
”मुझे कभी अंदाजा नहीं था कि एक मां अपने ही कलेजे के टुकड़े के साथ ऐसा कर सकती है। पहले बच्चे की मौत को हमने हादसा समझा था, लेकिन अब शक गहरा गया है।”
— पीड़ित पिता का बयान

पुलिसिया कार्रवाई और जांच
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। हालांकि, यह घटना कुछ समय पुरानी बताई जा रही है, लेकिन अब तथ्यों के उजागर होने के बाद पुलिस ने आरोपी महिला के खिलाफ जांच तेज कर दी है।

पुलिस अधिकारियों का पक्ष:
पुलिस के अनुसार, मामला दर्ज कर लिया गया है और हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है। महिला की मानसिक स्थिति और पुराने रिकॉर्ड को भी खंगाला जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
संपादकीय टिप्पणी: यह घटना समाज की मानसिक सेहत और पारिवारिक सुरक्षा पर गहरे सवाल खड़े करती है। इस तरह के मामलों में मनोवैज्ञानिक पहलू की जांच भी अनिवार्य है।








