लैंसकार्ट गाइडलाइंस विवाद: शिमला में हिंदू संगठनों का हंगामा, पुलिस ने नेताओं पर दर्ज की FIR

शिमला : चश्मा बनाने वाली मशहूर कंपनी ‘लैंसकार्ट’ (Lenskart) द्वारा जारी नई ड्रेस-कोड गाइडलाइंस को लेकर देशव्यापी विरोध की आग अब हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला तक पहुंच गई है। संजौली स्थित लैंसकार्ट स्टोर में घुसकर हंगामा करने और धार्मिक गतिविधियां करने के आरोप में पुलिस ने हिंदू संगठन के नेताओं के खिलाफ कड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया है।
क्या है पूरा मामला? जानकारी के अनुसार, बीते बुधवार को हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता और नेता भारी संख्या में संजौली स्थित लैंसकार्ट स्टोर के बाहर एकत्रित हुए। प्रदर्शनकारियों ने कंपनी की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। माहौल तब और तनावपूर्ण हो गया जब प्रदर्शनकारी स्टोर के भीतर घुस गए। स्टोर के अंदर कार्यकर्ताओं ने वहां मौजूद कर्मचारियों को तिलक लगाया, कलावा बांधा और सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा स्टोर प्रबंधन की शिकायत और मामले की गंभीरता को देखते हुए संजौली पुलिस ने कार्रवाई की है। पुलिस ने हिंदू संगठन के नेताओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्नलिखित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है:

- धारा 299: धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुँचाना।
- धारा 302: धार्मिक विश्वास का अपमान करना।
- धारा 333: लोक सेवक को कर्तव्य निर्वहन से रोकने के लिए स्वेच्छा से चोट पहुँचाना या उपद्रव।
- धारा 3(5): संयुक्त उत्तरदायित्व (समूह द्वारा किया गया अपराध)।
क्यों भड़का है विवाद? विवाद की जड़ लैंसकार्ट की वह कथित नई गाइडलाइंस हैं, जो कर्मचारियों के पहनावे और कार्यशैली को लेकर जारी की गई हैं। आरोप है कि इन गाइडलाइंस में हिजाब को पहनने की मंजूरी दी गई है, लेकिन तिलक, बिंदी और कलावा जैसे हिंदू धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल पर चुप्पी साधी गई है या उन्हें ड्रेस कोड का हिस्सा नहीं माना गया है। हिंदू संगठनों का कहना है कि यह भेदभावपूर्ण नीति है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुलिस की कार्रवाई जारी शिमला पुलिस के अनुसार, संजौली थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। सीसीटीवी फुटेज और मौके पर मौजूद गवाहों के आधार पर आगामी कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं। शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने लोगों से संयम बरतने की अपील की है।

क्या कहती है कंपनी? > हालांकि देशभर में हो रहे विरोध के बीच कंपनी की ओर से अभी तक इस विशिष्ट घटना पर कोई आधिकारिक विस्तृत बयान नहीं आया है, लेकिन सोशल मीडिया पर इस नीति को लेकर बहस छिड़ी हुई है।








