मुआवजे और गेहूं की खरीद में देरी पर बिफरे किसान; 1 मई से पंजाब में ‘चक्का जाम’ की चेतावनी

जालंधर/चंडीगढ़: पिछले सीजन में आई विनाशकारी बाढ़ और हाल ही में हुई बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा न मिलने से पंजाब के किसानों में भारी रोष है। आज़ाद किसान मोर्चा (पंजाब) ने राज्य और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
30 अप्रैल तक का अल्टीमेटम
मोर्चा के वरिष्ठ नेताओं सुख गिल (मोगा), नछत्तर सिंह, जसबीर सिंह आहलूवालिया और परमजीत सिंह जब्बोवाल ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सरकार को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि 30 अप्रैल तक किसानों के खातों में मुआवजा राशि नहीं पहुंची और मंडियों में गेहूं की खरीद सुचारू रूप से शुरू नहीं की गई, तो किसान सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।

1 मई से नेशनल हाईवे और टोल प्लाजा होंगे ठप
किसान नेताओं ने अपने आंदोलन की रूपरेखा साझा करते हुए कहा:
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- अनिश्चितकालीन बंद: 1 मई से पंजाब के सभी नेशनल हाईवे और टोल प्लाजों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया जाएगा।
- ट्रैक्टर मार्च: किसान अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ सड़कों पर डेरा डालेंगे, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो सकता है।
- दोहरी मार: नेताओं का कहना है कि किसान पहले ही मौसम की मार झेल रहा है और अब सरकारी सुस्ती उनकी आर्थिक कमर तोड़ रही है।
”सरकार हमारी धैर्य की परीक्षा न ले। यदि समय रहते मुआवजे और खरीद का समाधान नहीं हुआ, तो पूरा पंजाब जाम कर दिया जाएगा और इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”
— सुख गिल, वरिष्ठ किसान नेता

मुख्य मांगें:
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- बाढ़ और ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलों का तुरंत उचित मुआवजा।
- मंडियों में गेहूं की खरीद प्रक्रिया में तेजी लाना और उठान सुनिश्चित करना।
- किसानों को फसल बेचने में आ रही तकनीकी दिक्कतों को दूर करना।
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आगामी संकट:
यदि सरकार और किसान मोर्चा के बीच सहमति नहीं बनती है, तो मई की शुरुआत में आम जनता को भारी यातायात समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस चेतावनी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।








