फिलिस्तीनियों की एंट्री रोकी; 15 देशों पर आंशिक बैन, 1 जनवरी से लागू होंगे नियम

वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए मंगलवार को इमिग्रेशन नीतियों पर बड़ा प्रहार किया है। ट्रम्प ने एक नए घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत 5 नए देशों के नागरिकों और फिलिस्तीनियों के अमेरिका आने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस ताजा कार्रवाई के बाद अब अमेरिका में पूर्ण या आंशिक यात्रा प्रतिबंध का सामना करने वाले देशों की कुल संख्या 39 पहुंच गई है।
यह सख्त कदम पिछले महीने व्हाइट हाउस के पास नेशनल गार्ड्स पर एक अफगान शरणार्थी द्वारा की गई गोलीबारी के बाद उठाया गया है। जांच में सुरक्षा और स्क्रीनिंग प्रणाली में गंभीर खामियां पाई गईं, जिसके बाद ट्रम्प प्रशासन ने सुरक्षा को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया।
इन देशों पर लागू हुई पूरी पाबंदी
व्हाइट हाउस की फैक्ट-शीट के अनुसार, बुर्किना फासो, माली, नाइजर, साउथ सूडान और सीरिया पर पूर्ण यात्रा प्रतिबंध लगाया गया है। लाओस और सिएरा लियोन, जिन पर पहले आंशिक प्रतिबंध था, अब उन्हें भी पूर्ण प्रतिबंध की श्रेणी में डाल दिया गया है। इनके अलावा अफगानिस्तान, ईरान, लीबिया और सोमालिया जैसे 12 देशों पर पहले से ही पाबंदी लागू है।
आंशिक प्रतिबंध और तुर्कमेनिस्तान को राहत
घोषणा पत्र के अनुसार 15 नए देशों पर आंशिक प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिसका अर्थ है कि वहां के नागरिकों को स्थायी निवास (इमिग्रेंट वीजा) नहीं मिलेगा। हालांकि, तुर्कमेनिस्तान के लिए राहत की खबर है; वहां से नॉन-इमिग्रेंट वीजा पर लगा प्रतिबंध हटा लिया गया है, लेकिन इमिग्रेंट वीजा पर रोक जारी रहेगी।

इन्हें मिलेगी प्रतिबंधों से छूट
नए नियमों में कुछ वर्गों को राहत भी दी गई है। अमेरिका के कानूनी स्थायी निवासी (ग्रीन कार्ड धारक) और जिनके पास पहले से वैध वीजा है, उन पर यह असर नहीं पड़ेगा। साथ ही राजनयिकों, अंतरराष्ट्रीय एथलीटों और विशेष चिकित्सा कारणों से आने वाले लोगों को भी छूट दी गई है। छात्र वीजा पर भी मामले के आधार पर विचार किया जा सकता है।
ट्रम्प का रुख: ‘रिवर्स माइग्रेशन’ ही समाधान
घोषणा के दौरान ट्रम्प ने पिछली इमिग्रेशन नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि गलत नीतियों की वजह से अमेरिका में अपराध और अव्यवस्था बढ़ी है। ट्रम्प के अनुसार, तकनीकी प्रगति के बावजूद आम अमेरिकियों का जीवन असुरक्षित हुआ है और इस समस्या का एकमात्र प्रभावी समाधान ‘रिवर्स माइग्रेशन’ यानी लोगों को उनके देश वापस भेजना है।
नए प्रतिबंध और सीमाएं 1 जनवरी से प्रभावी रूप से लागू हो जाएंगी। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जिन देशों की जांच प्रणाली कमजोर है और जहां से वीजा ओवरस्टे की दर अधिक है, उन्हें किसी भी सूरत में रियायत नहीं दी जाएगी।







