आम आदमी पार्टी को अब तक का सबसे बड़ा झटका: राघव चड्ढा ने थामा भाजपा का दामन, 2/3 सांसदों के साथ किया विलय का ऐलान

आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर चल रही अंदरूनी कलह शुक्रवार को एक बड़े विस्फोट के साथ सामने आई। पार्टी के ‘पोस्टर बॉय’ और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव संदीप पाठक और सांसद अशोक मित्तल के साथ मिलकर ‘आप’ छोड़ने और भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का औपचारिक ऐलान कर दिया है।
संवैधानिक प्रावधानों का हवाला, ‘आप’ का अस्तित्व संकट में
एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा ने भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी। उन्होंने घोषणा की कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई (2/3) सदस्य संविधान के प्रावधानों का उपयोग करते हुए अपना विलय भाजपा में कर रहे हैं।
चड्ढा ने कहा, “हमने यह फैसला किया है कि AAP के दो-तिहाई सदस्य खुद को BJP में मिला लेंगे। सुबह ही हमने इसके दस्तावेज़ राज्यसभा सभापति को सौंप दिए हैं।” इस कदम से पाला बदलने वाले सांसदों की सदस्यता पर दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) का खतरा नहीं रहेगा।
“खून-पसीने से सींचा, पर पार्टी लक्ष्य से भटकी”
प्रेस वार्ता के दौरान राघव चड्ढा भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा, “मैंने इस पार्टी को अपने खून-पसीने से सींचा था और अपनी जवानी के 15 साल इसे दिए। लेकिन आज यह पार्टी अपने मूल्यों और सिद्धांतों से भटक चुकी है। अब यह देशहित के लिए नहीं, बल्कि निजी फायदों के लिए काम कर रही है।” उन्होंने आगे जोड़ा कि पिछले कुछ समय से उन्हें लग रहा था कि वह एक गलत पार्टी में सही व्यक्ति हैं।

इन दिग्गज सांसदों ने छोड़ी झाड़ू, थामेंगे कमल
राघव चड्ढा के नेतृत्व में जिन सांसदों ने भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया है, उनमें पार्टी के कई बड़े चेहरे शामिल हैं:
- संदीप पाठक (राष्ट्रीय महासचिव, संगठन)
- अशोक मित्तल (लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक)
- हरभजन सिंह (पूर्व क्रिकेटर)
- स्वाती मालीवाल (पूर्व DCW अध्यक्ष)
- विक्रम साहनी
- राजेंद्र गुप्ता
सियासी गलियारों में हड़कंप
इस खबर ने विपक्षी खेमे और दिल्ली की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की ताकत अब नगण्य रह जाएगी। जानकारों का मानना है कि राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे रणनीतिकारों का जाना अरविंद केजरीवाल के लिए अब तक का सबसे बड़ा व्यक्तिगत और राजनीतिक नुकसान है।
बड़ी बातें:
- कुल 10 में से 7 सांसदों ने पाला बदला।
- संवैधानिक विलय के चलते सदस्यता पर खतरा नहीं।
- संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भी दी राघव चड्ढा की बातों को सहमति।
- AAP नेतृत्व की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

संपादकीय टिप्पणी: यह घटनाक्रम देश की राजनीति की दिशा बदल सकता है, विशेषकर पंजाब और दिल्ली में जहां AAP का मजबूत आधार रहा है।







